Climate change Maharashtra (सोर्सः सोशल मीडिया) 
मुंबई

जलवायु परिवर्तन पर नैतिक जिम्मेदारी जरूरी, मुंबई क्लायमेट वीक में मंत्री पंकजा मुंडे ने व्यक्त किया मत

Pankaja Munde: मुंबई क्लायमेट वीक में मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि जलवायु परिवर्तन को नीतिगत नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखना जरूरी है।

आंचल लोखंडे

Mumbai Climate Week: महाराष्ट्र की पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री पंकजा मुंडे ने मंगलवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दों को केवल नीतिगत विषय के रूप में नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए। मुंबई में आयोजित ‘मुंबई क्लायमेट वीक’ के अंतर्गत “स्केलिंग अप क्लायमेट फाइनेंस फॉर अ सस्टेनेबल एंड रेजिलिएंट महाराष्ट्र” विषय पर आयोजित चर्चा सत्र में उन्होंने यह विचार व्यक्त किए।

जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में मंत्री मुंडे ने कहा कि बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा और जल संकट जैसे दुष्प्रभाव पहले से ही महसूस किए जा रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए आज किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भविष्य में अवश्य दिखाई देंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि पर्यावरण शिक्षा को विद्यालय स्तर पर नागरिक शास्त्र की तरह एक स्वतंत्र विषय के रूप में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी अधिक जागरूक बन सके।

जलवायु परिवर्तन वैश्विक जिम्मेदारी

मंत्री मुंडे ने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना महाराष्ट्र जैसे प्रगतिशील राज्य के लिए अनिवार्य है। प्रकृति पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण पूरी मानवता को प्रभावित करता है। इसलिए जलवायु परिवर्तन केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण के लिए उपलब्ध निधि का उपयोग प्रभावी और परिणामोन्मुखी होना चाहिए। इस अवसर पर ‘मित्रा’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रवीण परदेशी, पर्यावरण विभाग की सचिव जयश्री भोज, वर्ल्ड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी माधव पाई, एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर सारांश बाजपेयी तथा काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर की प्रोग्राम लीड डॉ. पुष्प बजाज सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।

जलवायु-अनुकूल परियोजनाओं को बढ़ावा

प्रवीण परदेशी ने कहा कि घरेलू वित्तीय संसाधनों और विभिन्न वित्तीय तंत्रों के माध्यम से जलवायु-अनुकूल परियोजनाओं को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। कृषि क्षेत्र में विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा, सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहन, अपशिष्ट जल का पुनः उपयोग तथा फसल पद्धति में बदलाव जैसे कदम सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

विशेषज्ञों ने बताया कि अद्यतन राज्य जलवायु परिवर्तन कार्य योजना, नवीकरणीय ऊर्जा नीति और ‘जस्ट ट्रांजिशन’ रोडमैप के माध्यम से महाराष्ट्र उप-राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु कार्रवाई में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। ‘परिवर्तन: एवरी तालुका क्लायमेट रेडी’ पहल के जरिए राज्य में तालुका स्तर पर जलवायु विश्लेषण को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि भविष्य की चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।

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