ADR Report Mumbai Corporators: 2026 में संपन्न हुए बीएमसी (BMC) चुनावों के बाद नवनिर्वाचित 227 नगरसेवकों के चुनावी हलफनामों का विश्लेषण करने पर राजनीति के अपराधीकरण की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की सांख्यिकीय रिपोर्ट के अनुसार, इस बार कुल 54 नगरसेवकों ने खुद पर आपराधिक मामले होने की घोषणा की है, जो कुल निर्वाचित सदस्यों का लगभग 24% है।
इन आंकड़ों का गहरा विश्लेषण बताता है कि केवल सामान्य मामले ही नहीं, बल्कि 13% (29 नगरसेवक) ऐसे हैं जिन पर हत्या, हत्या का प्रयास और अपहरण जैसे गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पिछले चुनावों की तुलना में यह आंकड़ा राजनीतिक दलों द्वारा 'जिताऊ' उम्मीदवार चुनने की प्रवृत्ति को दर्शाता है, भले ही उनका पिछला रिकॉर्ड साफ न हो।
विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच आपराधिक पृष्ठभूमि वाले विजेताओं का प्रतिशत काफी भिन्न है। सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी भाजपा (BJP) के 89 विजेताओं में से 29 (33%) पर आपराधिक मामले हैं। वहीं शिवसेना (UBT) के 65 में से 10 (15%) और एकनाथ शिंदे नीत शिवसेना के 29 में से 7 (24%) नगरसेवकों ने अपने हलफनामे में अपराध स्वीकार किए हैं। कांग्रेस के 24 में से 3 (13%) सदस्य भी इस सूची में शामिल हैं।
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गंभीर अपराधों की श्रेणी में भाजपा के 16, शिवसेना (UBT) के 7 और शिवसेना के 3 नगरसेवक आते हैं। इन मामलों में भारतीय दंड संहिता (IPC) की उन धाराओं के तहत केस दर्ज हैं, जिनमें 5 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि इनमें से कई मामले लंबे समय से अदालतों में लंबित हैं, जिससे उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का मौका मिल जाता है।
अपराध के साथ-साथ धनशक्ति का प्रभाव भी स्पष्ट दिखा है। कुल विजेताओं में से 79% (180) करोड़पति नगरसेवक हैं, जिनकी औसत संपत्ति 7.18 करोड़ रुपये है। शैक्षिक योग्यता की बात करें तो 50% नगरसेवक स्नातक या उससे अधिक शिक्षित हैं, जबकि 47% की शिक्षा 5वीं से 12वीं कक्षा के बीच है। महिलाओं की भागीदारी इस बार 60% रही है, जो एक सकारात्मक पहलू है।