Mumbai BJP MLA Beggar Experiment: घाटकोपर पूर्व के विधायक पराग शाह जब एक दिन आम भिखारी का रूप धारण कर सड़कों पर निकले तो उन्हें समाज के अलग-अलग चेहरों का अनुभव हुआ।किसी ने उन्हें दुत्कारा, किसी ने पैसे दिए, तो किसी ने भूखा देखकर खाना खिलाया।लेकिन कुछ लोगों ने मानवता की ऐसी मिसाल पेश की कि विधायक पराग शाह ने बाद में उन्हें अपने पास बुलाकर सम्मानित किया और 21-21 हजार रुपए की पारितोषिक राशि देकर उनका आभार जताया।
बताया जाता है कि जैन संत नम्रमुनि महाराज ने पराग शाह को एक दिन भिखारी बनकर आम गरीब की जिंदगी और उसकी तकलीफ को करीब से महसूस करने की सलाह दी थी, गुरु की सलाह पर शाह ने अपने ही विधानसभा क्षेत्र में भिखारी का वेश धारण किया और स्टेशन के आसपास लोगों से भिक्षा मांगते हुए दिन बिताया।
इस दौरान कई लोगों ने उन्हें पहचान नहीं पाया कुछ लोगों ने उन्हें देखकर मुंह फेर लिया,रेलवे ब्रिज पर एक भिखारी ने तो नए भिखारी को देख कर झगड़ा करने आ गई कि नया कौन आ गया। जबकि एक ने शुरू में 20 रुपए दे दिए,शाह ने बताया कि मुझे 64 रुपया भीख मांगने पर मिला था ,वहीं, कुछ ऐसे भी लोग मिले जिन्होंने अपनी सीमित आमदनी के बावजूद उन्हें भोजन कराया।
समोसा विक्रेता मोहम्मद समद के पास जब शाह पहुंचे तो उन्होंने समोसा मांगा शाह के पास पैसे कम थे। समद ने बिना किसी सवाल के उन्हें समोसा खिला दिया।लेकिन जब शाह अपने असली रूप में वहां पहुंचे और समद को बताया कि वही व्यक्ति उस दिन उनके पास समोसा मांगने आया था, तो समद हैरान रह गए।समद ने कहा, “मेरे पास समोसा मांगने आए थे और उनके पास पैसे कम थे हमने कुछ नहीं कहा और उन्हें समोसा दे दिया दूसरे दिन जब अपने लोगों के साथ आए तो पता चला कि वह कोई और नहीं, बल्कि यहां के विधायक पराग शाह हैं उन्होंने मुझे शाबाशी दी और आज बुलाकर सम्मानित किया। मुझे अपने काम पर गर्व महसूस हो रहा है।”
इसी तरह पुलाव विक्रेता बबलू शेट्टी ने भी भिखारी बने शाह की मदद की शाह ने उनसे बिरयानी मांगी। बबलू ने बताया कि उनके पास जितने पैसे थे, उतने की ही बिरयानी उन्होंने दे दी। इसके बाद शाह ने कहा कि उनके पास वापस जाने के लिए किराया नहीं है।
बबलू ने उन्हें रिक्शे का किराया दिया और यह भी पूछा कि उन्हें और किसी चीज की जरूरत तो नहीं है। कुछ घंटे बाद जब वही व्यक्ति अपने असली रूप में उनके सामने आया तो बबलू घबरा गए। बबलू ने बताया, “जब वह कुछ घंटे बाद अपने असली रूप में हमारे पास आए तो हम डर गए,हमें लगा कि शायद हमसे कोई बड़ी गलती हो गई और हम उन्हें पहचान नहीं पाए लेकिन शाह साहब ने हमें डांटने के बजाय शाबाशी दी और आज अपने बुलाकर सम्मानित किया।”
पराग शाह ने नवभारत से कहा कि उन छोटे रेहड़ी वालों ने प्रभावित किया,सीमित साधनों के बावजूद भूखे व्यक्ति को भोजन कराया और उसके घर लौटने के लिये किराया तक दिया आज ऐसे लोगों को सम्मानित कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि इंसानियत की कीमत पैसे से नहीं, भावना से तय होती है।
(इनपुटः दयाशंकर पाण्डेय)