MPSC पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच के लिए पांच सदस्यीय विशेष समिति गठित की गई है।
वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को इस महत्वपूर्ण जांच कमेटी का सदस्य सचिव बनाया गया है।
पूर्व न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की अध्यक्षता वाली इस समिति को दो महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करनी होगी।
Tukaram Mundhe Secretary MPSC Investigation Committee: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं की जांच के लिए पूर्व न्यायमूर्ति दिलीप भोसले की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित करने की घोषणा की गई है।
आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है। जांच के लिए दो महीने की अवधि तय किए जाने की जानकारी विधायक रोहित पवार ने दी। वहीं, राज्य के मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों से आंदोलन स्थगित करने की अपील की।
पुणे में आंदोलन स्थल पर पहुंचे मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने कहा कि विद्यार्थियों की मांगों पर कानून और संविधान के दायरे में कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विद्यार्थियों से सरकार की भूमिका पर विचार करते हुए आंदोलन स्थगित करने का आग्रह किया। इस बीच, रोहित पवार ने विद्यार्थियों के सामने जांच समिति के मसौदे की प्रमुख शर्तें रखीं इसमें जांच का दायरा किसी एक परीक्षा तक सीमित न रखते हुए पेपर लीक से जुड़े सभी मामलों को शामिल करने का प्रस्ताव है।
आयोग के कर्मचारियों, सदस्यों और अध्यक्ष समेत संबंधित लोगों की भूमिका और जिम्मेदारी तय करने की मांग भी मसौदे में शामिल है। विद्यार्थी अपने पास मौजूद सबूत समिति के सामने पेश कर सकेंगे।
समिति में दिलीप भोसले और तुकाराम मुंडे के अलावा प्रशासनिक अधिकारी बी। डी। नाईक, गणेश पाटील और पुलिस अधिकारी लखमी गौतम शामिल हैं। पवार के अनुसार, जांच के लिए पहले प्रस्तावित तीन महीने की अवधि घटाकर दो महीने करने का निर्णय लिया गया है।
मसौदे में सत्याग्रह आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने और वर्ष 2027 में होने वाली ग्रुप-C परीक्षा के पदों की संख्या दोगुनी करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा, जांच निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से हो, इसके लिए जांच पूरी होने तक आयोग के मौजूदा अध्यक्ष को पद पर नहीं रखने की मांग विद्यार्थियों की ओर से सरकार के सामने रखी गई है।
रोहित पवार ने समिति के गठन का स्वागत करते हुए इस मांग पर भी निर्णय लेने की अपेक्षा जताई। इस दौरान मसौदे का अंतिम प्रारूप रोहित पवार को सौंपा गया। हालांकि, मसौदे में शामिल मांगों पर सरकार के अंतिम निर्णय और उनके क्रियान्वयन को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
- नवभारत लाइव के लिए पुणे से समीर सय्यद की रिपोर्ट