RSS चीफ मोहन भागवत (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

'RSS न सत्ता चाहता है, न लोकप्रियता', मोहन भागवत का बड़ा बयान, जानिए राजनीति और इतिहास पर क्या कहा

RSS Centenary Event : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि संघ किसी के विरोध में नहीं बल्कि सकारात्मक शक्ति है। उन्होंने डॉ. हेडगेवार के संघर्षों और संघ के वास्तविक उद्देश्य पर प्रकाश डाला।

आकाश मसने

Mohan Bhagwat Speech: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शनिवार को एक जनसभा को संबोधित करते हुए संघ की विचारधारा और कार्यप्रणाली को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि संघ न तो किसी के "खिलाफ" है और न ही उसे सत्ता या लोकप्रियता की कोई लालसा है।

विचारधाराओं का संगम और समाज की दिशा

भागवत ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उभरी विभिन्न विचारधाराओं का जिक्र किया। उन्होंने राजा राम मोहन रॉय, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती जैसे समाज सुधारकों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने समाज को दिशा देने का प्रयास किया। हालांकि, उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि आज भी समाज को सही दिशा देने और अनुकूल वातावरण बनाने का काम पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है।

क्या है RSS का उद्देश्य?

मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि RSS किसी घटना की प्रतिक्रिया स्वरूप काम नहीं करता। उन्होंने कहा कि संघ किसी के विरोध में नहीं है। हमारा मुख्य उद्देश्य देश में चल रहे सकारात्मक प्रयासों को समर्थन देना और उन्हें मजबूती प्रदान करना है। उन्होंने यह भी साफ किया कि RSS कोई अर्धसैनिक बल नहीं है। भले ही स्वयंसेवक 'पथ संचलन' करते हैं और लाठी (दंड) चलाते हैं, लेकिन इसे एक अखाड़े के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह अनुशासन और संगठन का प्रतीक है।

राजनीति और कांग्रेस का इतिहास

राजनीति पर चर्चा करते हुए माेहन भागवत ने कहा कि RSS प्रत्यक्ष रूप से राजनीति में शामिल नहीं है, हालांकि संघ से जुड़े कुछ लोग राजनीतिक जीवन में सक्रिय हो सकते हैं। उन्होंने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए बताया कि अंग्रेजों ने 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस' की स्थापना एक "सुरक्षा वाल्व" के रूप में की थी, लेकिन भारतीयों ने अपनी सूझबूझ से इसे स्वतंत्रता संग्राम का एक शक्तिशाली हथियार बना दिया।

डॉ. हेडगेवार का संघर्ष और 'कोकेन' कोडनेम

RSS चीफ भागवत ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के शुरुआती जीवन के संघर्षों को साझा किया। उन्होंने बताया कि कैसे 13 वर्ष की उम्र में प्लेग के कारण उनके माता-पिता का निधन हो गया था। आर्थिक तंगी के बावजूद हेडगेवार का क्रांतिकारी जज्बा कम नहीं हुआ।

उन्होंने कोलकाता में मेडिकल की पढ़ाई के दौरान हेडगेवार के क्रांतिकारी समूहों से जुड़ाव का एक रोचक किस्सा सुनाया। भागवत ने बताया कि उस समय हेडगेवार "कोकेन" कोडनेम से काम करते थे। एक बार पुलिस गलती से उन्हें गिरफ्तार भी कर ले गई थी, जिसका जिक्र रास बिहारी बोस की किताब में मिलता है।

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