मलाड के चौक वर मनसे कार्यकर्ता और जैन मुनी (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

शिवाजी महाराज के जीरेटोप पर लगाया धार्मिक झंडा, मनसे ने बीच सड़क पर जैन मुनी से मंगवाई माफी, देखें VIDEO

Shivaji Maharaj Jiretop Controversy: मुंबई में शिवाजी महाराज के जीरेटोप पर धार्मिक झंडा लगाने पर मचा भारी बवाल। मनसे कार्यकर्ताओं के उग्र विरोध के बाद जैन मुनि ने बीच सड़क पर मांगी सार्वजनिक माफी।

गोरक्ष पोफली

MNS Protest Malad Jain Muni Apologizes: महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में सफेद पट्टी विवाद के बीच एक और ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे शहर के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। मुंबई के मलाड इलाके में छत्रपति शिवाजी महाराज की अस्मिता से जुड़े एक प्रतीक के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई, जिसके बाद इलाके में भारी बवाल मच गया।

क्या है पूरा सनसनीखेज मामला?

यह पूरा विवाद मलाड पूर्व के एक व्यस्त चौक पर शुरू हुआ, जहाँ छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रतिष्ठित जीरेटोप की एक विशाल प्रतीकात्मक मूर्ति स्थापित है। जानकारी के मुताबिक, एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान जैन समुदाय के एक व्यक्ति ने अचानक इस स्मारक के ऊपर चढ़कर उस पर सफेद धार्मिक झंडा लगा दिया। जैसे ही इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, देखते ही देखते पूरे इलाके में तनाव फैल गया।

मनसे का रुद्र रूप और पुलिस की एंट्री

छत्रपति शिवाजी महाराज, जिन्हें महाराष्ट्र का गौरव और पहचान माना जाता है, उनके प्रतीक पर किसी अन्य धर्म का झंडा लगाने की खबर मिलते ही महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ता एक्शन मोड में आ गए। मनसे के मलाड संभाग अध्यक्ष महेश फरकासे भारी संख्या में कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुँच गए। मौके की नजाकत को देखते हुए पुलिस बल भी तुरंत वहां पहुँचा ताकि स्थिति को नियंत्रण से बाहर होने से रोका जा सके। मनसे कार्यकर्ताओं ने पुलिस की मौजूदगी में ही उस व्यक्ति को आड़े हाथों लिया और कड़े शब्दों में सवाल किया कि महाराष्ट्र की पहचान माने जाने वाले प्रतीक पर कोई धार्मिक झंडा कैसे लगा सकता है? कार्यकर्ताओं का कहना था कि शिवाजी महाराज पूरे महाराष्ट्र के आराध्य हैं और ऐसी हरकतें जनभावनाओं को गहरी ठेस पहुँचाती हैं।

झुकना पड़ा और बीच सड़क पर मांगनी पड़ी माफी

बढ़ते दबाव और मनसे के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए, जैन व्यक्ति को अपनी गलती का एहसास हुआ। भारी भीड़ और पुलिस के सामने उस व्यक्ति ने हाथ जोड़कर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उसने दावा किया कि यह गलती अनजाने में हुई थी और उसका इरादा किसी का अपमान करना नहीं था। इसके तुरंत बाद, स्मारक के ऊपर से उसने उस सफेद झंडे को हटा दिया। झंडा हटाते ही पूरे इलाके में छत्रपति शिवाजी महाराज की जय और जय भवानी, जय शिवाजी के नारों की गूंज सुनाई देने लगी।

सफेद पट्टी विवाद की आग में घी का काम

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मुंबई में पहले से ही सफेद पट्टी विवाद को लेकर घमासान मचा हुआ है। दरअसल, जैन भिक्षुओं की पदयात्रा की सुविधा के लिए मुंबई की कई सड़कों पर सफेद पट्टियां पेंट की गई थीं, जिसका मनसे और शिवसेना जैसे विपक्षी दल कड़ा विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि सार्वजनिक सड़कों को किसी विशेष समुदाय की सुविधा के लिए इस तरह नहीं बदला जा सकता।

मलाड की इस घटना ने मुंबई में सांप्रदायिक और राजनीतिक तनाव को और अधिक हवा दे दी है। हालांकि, पुलिस के हस्तक्षेप और सार्वजनिक माफी के बाद स्थिति फिलहाल शांत है, लेकिन मनसे ने चेतावनी दी है कि भविष्य में शिवाजी महाराज के किसी भी प्रतीक का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। महाराष्ट्र की राजनीति में पहले से ही ऑपरेशन टाइगर और दलबदल के कारण अस्थिरता का माहौल है, ऐसे में अस्मिता से जुड़े ये मुद्दे आग में घी डालने का काम कर रहे हैं।

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