

Nagpur Conversion Case Maulana Surrender: नागपुर के बहुचर्चित जबरन धर्मांतरण, दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग मामले में पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली है। इस प्रकरण का तीसरा और मुख्य आरोपी, मौलाना मजरत महमूद मकसूद, जो अब तक फरार चल रहा था, उसने बुधवार देर रात सोनेगांव पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस के बढ़ते दबाव और लगातार जारी छापेमारी के बाद मौलाना के पास सरेंडर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
सोनेगांव पुलिस स्टेशन के निरीक्षक राहुल तसरे ने इस पूरे मामले की गंभीरता पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि इस घटना की शुरुआत 13 जून 2026 को हुई, जब पीड़िता ने थाने में अपना बयान दर्ज कराया था। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता 2026 की विभिन्न धारा 64, 308, 296, 351, 361 और महाराष्ट्र जादू-टोना प्रतिबंधक अधिनियम, 2013 की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया है। थानेदार के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए शुरुआत में ही दो आरोपियों, अयाज ताज मदारे (26) और आमिर मेहमूद शेख (30) को गिरफ्तार कर लिया गया था। इन दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ पहले इन्हें पांच दिन की पुलिस कस्टडी मिली और 17 जून को इसे 21 जून तक के लिए बढ़ा दिया गया है।
पुलिस की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। मुख्य आरोपी अयाज ने पीड़िता को नशीला पदार्थ पिलाकर उसका अश्लील वीडियो बनाया और फिर उसे धर्मांतरण के लिए मजबूर किया। पुलिस ने अयाज के घर से एक संदिग्ध नशीले पदार्थ की बोतल भी बरामद की है, जिसका रासायनिक विश्लेषण किया जा रहा है। मौलाना महमूद पर आरोप है कि उसने ही पीड़िता का जबरन निकाह पढ़वाया था।
सोनेगांव पुलिस अब इस मामले में डिजिटल फॉरेंसिक जांच का सहारा ले रही है। आरोपियों के मोबाइल, सिम कार्ड, ईमेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स खंगाले जा रहे हैं ताकि यह पता चल सके कि अश्लील वीडियो किन-किन लोगों को भेजा गया था। इसके अलावा, अयाज द्वारा पीड़िता से ऑनलाइन यूपीआई के जरिए ली गई रकम की भी बैंक से जानकारी मांगी गई है।
DCP सिंगा रेड्डी ऋषिकेश ने पुष्टि की है कि सरेंडर करने वाले मौलाना को गुरुवार, 18 जून को नागपुर न्यायालय में पेश कर पुलिस हिरासत की मांग की जाएगी। इस गिरफ़्तारी के बाद अब इस धर्मांतरण सिंडिकेट से जुड़े कई और राज खुलने की उम्मीद है।