समृद्धि महामार्ग (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

मुंबई-ठाणे वालों की मौज! 6,748 करोड़ के नए एलीवेटेड हाईवे को मंजूरी, समृद्धि महामार्ग से सीधे जुड़ेगी मायानगरी

MMRDA ने ठाणे के साकेत से आमने तक 21.35 किमी लंबे एलीवेटेड हाईवे को मंजूरी दी है। 6,748 करोड़ रुपए का यह प्रोजेक्ट समृद्धि महामार्ग को मुंबई से जोड़कर ट्रैफिक जाम खत्म करेगा।

आकाश मसने

MMRDA Elevated Highway: मुंबई और ठाणे के बीच सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने 'समृद्धि महामार्ग' को सीधे मुंबई से जोड़ने और ठाणे के ट्रैफिक को रफ्तार देने के लिए 6,748 करोड़ रुपए के विशाल एलीवेटेड हाईवे प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। यह नया कॉरिडोर ठाणे के साकेत से शुरू होकर आमने तक जाएगा, जिससे भिवंडी और अंजुर जैसे इलाकों में लगने वाले घंटों के जाम से मुक्ति मिलेगी।

आमने का 'बॉटलनेक' होगा खत्म

वर्तमान में, नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग से आने वाले वाहनों को मुंबई में प्रवेश करते समय आमने के पास भारी ट्रैफिक का सामना करना पड़ता है। भिवंडी और आसपास के क्षेत्रों में बड़े गोदामों की वजह से भारी वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है, जिससे यह पूरा स्ट्रेच हमेशा जाम रहता है। नए एलीवेटेड हाईवे के बनने से वाहन सीधे बिना किसी रुकावट के ठाणे और मुंबई में प्रवेश कर सकेंगे।

प्रोजेक्ट की तकनीकी खासियतें

21.35 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट को आधुनिक इंजीनियरिंग के साथ तैयार किया जाएगा। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं।

कुल लंबाई: 21.35 किमी (12.55 किमी एलीवेटेड और 8.80 किमी ग्रीनफील्ड)।

लेन: यह पूरी तरह से 6-लेन का हाई-स्पीड कॉरिडोर होगा।

कनेक्टिविटी: यह ठाणे के आनंदनगर-साकेत एलीवेटेड रोड को सीधे राजनोली जंक्शन और आगे आमने से जोड़ेगा।

ढांचा: इसमें एक बड़ा पुल, तीन छोटे पुल, दो फ्लाईओवर्स और एक रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाया जाएगा। साथ ही, स्थानीय आवाजाही के लिए 6 अंडरपास भी दिए जाएंगे।

क्या होगा टोल का गणित?

MMRDA ने इस प्रोजेक्ट की लागत निकालने के लिए एक टोल सिस्टम का प्रस्ताव भी रखा है। इन दरों में सालाना 5% की बढ़ोतरी का भी सुझाव दिया गया है।

वाहन श्रेणी टोल शुल्क
कार (हल्के वाहन) 100 रुपए
छोटी बसें 160 रुपए
ट्रक और बड़ी बसें 340 रुपए
मल्टी-एक्सल भारी वाहन 645 रुपए

जमीन अधिग्रहण और बजट

इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 127 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता होगी, जिसमें से अधिकांश निजी भूमि है। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और MMRDA कमिश्नर संजय मुखर्जी के दिशा-निर्देशों के बाद इस प्रोजेक्ट को अंतिम मंजूरी मिली है। यह हाईवे न केवल समय बचाएगा बल्कि ईंधन की खपत को भी कम करेगा, जिससे पर्यावरण और यात्रियों की जेब दोनों को फायदा होगा।

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