Congress Support Ambadas Danve as MVA Candidate: महाराष्ट्र विधान परिषद की नौ रिक्त सीटों और एक उपचुनाव वाली सीट के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि नाटकीय घटनाक्रमों के साथ समाप्त हुई। शुक्रवार सुबह तक महाविकास आघाडी के भीतर दरारें साफ दिख रही थीं, लेकिन एक घंटे की उच्च स्तरीय बैठक के बाद समीकरण पूरी तरह बदल गए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा की कि कांग्रेस उद्धव ठाकरे के फैसले का सम्मान करती है और महाविकास आघाडी की एकजुटता बनाए रखने के लिए अंबादास दानवे की उम्मीदवारी का समर्थन करेगी।
इससे पहले, अंबादास दानवे के नाम के ऐलान पर कांग्रेस ने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी और खुद का उम्मीदवार उतारने का संकेत दिया था। हालांकि, शुक्रवार सुबह शिवसेना (UBT) के नेताओं और कांग्रेस नेतृत्व के बीच हुई मुलाकात में भविष्य के चुनावों पर बनी आपसी समझ ने इस विवाद को सुलझा दिया। इस बैठक में सांसद सुप्रिया सुले और अनिल देसाई भी मौजूद रहे, जिन्होंने गठबंधन की मजबूती पर जोर दिया।
नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब स्थिति स्पष्ट है कि 10 सीटों के लिए केवल 10 ही आवेदन आए हैं। सत्ताधारी गठबंधन 'महायुति' की ओर से भाजपा ने सुनील करजाटकर, माधवी नाइक, संजय भेंदे, विवेक कोल्हे, प्रमोद जठार और प्रज्ञा सातव को मैदान में उतारा है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने नीलम गोरहे और बच्चू काडू पर भरोसा जताया है, जबकि एनसीपी (अजित पवार) की ओर से जीशान सिद्दीकी उम्मीदवार हैं। विपक्ष की ओर से केवल अंबादास दानवे ही चुनावी दौड़ में हैं।
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बड़ा फैसला: कांग्रेस ने विधान परिषद चुनाव में अपना उम्मीदवार न उतारने और उद्धव ठाकरे के उम्मीदवार अंबादास दानवे का समर्थन करने का निर्णय लिया है।
निर्विरोध निर्वाचन: कुल 10 सीटों (9 रिक्त और 1 उपचुनाव) के लिए केवल 10 ही नामांकन दाखिल किए गए हैं, जिससे मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
सहमति: आगामी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों में सीटों के तालमेल पर विचार-विमर्श के बाद कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के बीच तनाव समाप्त हुआ।
उम्मीदवार: भाजपा से 6, शिंदे की शिवसेना से 2, अजित पवार की एनसीपी से 1 और महाविकास आघाडी (MVA) से 1 उम्मीदवार मैदान में हैं।
चूंकि उम्मीदवारों की संख्या रिक्त सीटों के बराबर है, इसलिए अब 12 मई को होने वाले मतदान की आवश्यकता नहीं रह गई है। नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद चुनाव आयोग आधिकारिक तौर पर सभी 10 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर देगा। कांग्रेस के इस रणनीतिक कदम को आगामी विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन को एकजुट रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।