डॉन अरुण गवली (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

डॉन अरुण गवली के फैमली में सियासी संग्राम, BMC चुनाव में आया ट्विस्ट, परिवार के 2 सदस्य आमने-सामने

BMC Elections: मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में डॉन अरुण गवली के परिवार के दो लोग एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरेंगे। इसकी वजह शिंदे की शिवसेना है।

आकाश मसने

Don Arun Gawli Family Contest In BMC Election: मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव को लेकर सभी पार्टियों ने जोरदार शुरुआत कर दी है। MNS और ठाकरे की शिवसेना ने गठबंधन कर लिया है। अब इस चुनाव में एक बड़ा ट्विस्ट आने वाला है, क्योंकि डॉन अरुण गवली के परिवार के दो सदस्य एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।

मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में डॉन अरुण गवली के परिवार के दो लोग एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने जा रहे हैं। यह बड़ा सियासी संग्राम शिंदे की शिवसेना की वजह से खड़ा हुआ है।

गवली की छोटी बेटी लड़ेगी चुनाव

अरुण गवली की छोटी बेटी योगिता गवली अपनी साली/भाभी और पूर्व कॉर्पोरेटर वंदना गवली के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी। योगिता गवली और वंदना गवली दोनों ने ही अपनी उम्मीदवारी की घोषणा कर दी है। वंदना गवली अरुण गवली के भाई की पत्नी हैं। वह पूर्व कॉर्पोरेटर रह चुकी हैं। महत्वपूर्ण यह है कि वंदना गवली ने शिवसेना के शिंदे गुट में शामिल होने का फैसला किया है।

अखिल भारतीय सेना का नेतृत्व बेटी के हाथ

डॉन अरुण गवली कुछ दिन पहले ही जेल से बाहर आए हैं। हालांकि, वह खुद सक्रिय राजनीति में शामिल नहीं होंगे। इसके बावजूद, उनकी राजनीतिक पार्टी अखिल भारतीय सेना मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन चुनाव में उतरेगी। इन म्युनिसिपल चुनावों का नेतृत्व अरुण गवली की बड़ी बेटी और पूर्व कॉर्पोरेटर गीता गवली करेंगी।

गवली की दोनों बेटियां लड़ेंगी चुनाव

अरुण गवली की बड़ी बेटी गीता गवली भी मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन में कॉर्पोरेटर हैं और वह इस बार भी चुनाव लड़ेंगी। उनकी छोटी बहन योगिता गवली भी अब मैदान में उतरेंगी। इस तरह अरुण गवली की दोनों बेटियां चुनाव लड़ेंगी। योगिता गवली के लिए यह पहला मौका होगा जब वह चुनावी मैदान में उतरेंगी।

17 साल बाद जेल से आए बाहर

बता दें कि अंडरवर्ल्ड डॉन अरुण गवली उर्फ डैडी 17 साल के बाद नागपुर जेल से बाहर आए है। उन्हें 2007 में शिवसेना नेता कमलाकर जामसांडेकर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अरुण गवली को जमानत दी। इसके बाद 3 सितंबर को डॉन अरुण गवली बेल पर नागपुर जेल से छूटे।

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