परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के साथ संजय निरुपम सोर्स: एक्स/@sanjaynirupam
मुंबई

मराठी का सम्मान जरूरी लेकिन... ऑटो चालकों को मोहलत दिलाने परिवहन मंत्री के दर पहुंचे संजय निरुपम

Marathi Language Rule: शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को ज्ञापन सौंप। उन्होंने कहा कि 85 फीसदी चालकों ने मराठी भाषा सीखी, बाकी बचे लोगों पर तुरंत सख्त कार्रवाई न हो।

वेदांत जोशी

Sanjay Nirupam Met Pratap Sarnaik: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चलाने वालों के लिए मराठी भाषा सीखना अनिवार्य किए जाने के बाद अब यह मुद्दा एक नया मोड़ ले रहा है। भाषा के सम्मान और रोजगार की व्यावहारिक दिक्कतों के बीच संतुलन बनाते हुए, शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने गैर-मराठी भाषी ऑटो चालकों के पक्ष में आवाज उठाई है। उन्होंने महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में सरकार से मांग की गई है कि जो ऑटो चालक अब तक मराठी नहीं सीख पाए हैं, उन्हें इसके लिए थोड़ा और अतिरिक्त समय दिया जाए।

भाषा का सम्मान अनिवार्य, जबरदस्ती नहीं

परिवहन मंत्री से मुलाकात के बाद संजय निरुपम ने अपनी और पार्टी की पुरानी विचारधारा को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा का सम्मान करना ही चाहिए और रोजमर्रा की बातचीत के लिए सभी को कम से कम इस भाषा की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए।

निरुपम ने दो टूक शब्दों में कहा, "महाराष्ट्र में रहकर कोई भी यह नहीं कह सकता कि 'मैं मराठी नहीं बोलूंगा।' यह पूरी तरह से अनुचित व्यवहार है।" उन्होंने याद दिलाया कि शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के समय से ही पार्टी का यह स्पष्ट मानना रहा है कि स्थानीय भाषा का आदर होना चाहिए।

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि भाषा के नाम पर किसी के साथ जबरदस्ती करने का सवाल ही नहीं उठता, लेकिन राज्य की संस्कृति का सम्मान हर हाल में किया जाना चाहिए।

85 फीसदी चालकों ने सीखी मराठी गौरतलब है कि बीते 1 मई को राज्य सरकार ने एक आदेश जारी किया था, जिसके तहत सभी ऑटो चालकों को मराठी भाषा का ज्ञान होना अनिवार्य कर दिया गया था। सरकार ने इसके लिए चालकों को तीन महीने की मोहलत दी थी। इस फैसले का जमीनी स्तर पर सकारात्मक असर भी दिखा है।

निरुपम ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकारी आदेश के बाद चालकों ने भारी उत्साह दिखाया। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग 85 प्रतिशत ऑटो चालकों ने मराठी भाषा का ज्ञान हासिल कर लिया है, जो कि एक बहुत अच्छी बात है।

एक आखिरी मौका और मिले

बचे हुए 15 फीसदी चालकों के संदर्भ में बात करते हुए निरुपम ने नरम रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि जो कुछ लोग रह गए हैं, उनकी अपनी कुछ निजी या व्यावहारिक समस्याएं रही होंगी। उन्होंने सरकार से अपील की है कि इन बचे हुए लोगों पर फिलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।

निरुपम ने स्पष्ट किया कि वो अभी उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के पक्ष में नहीं है। उन्हे लगता है कि इन लोगों को एक और मौका दिया जाना चाहिए। अगर इस अतिरिक्त समय के बाद भी वे भाषा नहीं सीखते हैं, तो निश्चित रूप से उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

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