Manoj Jarange Patil (फोटो क्रेडिट-इंस्टाग्राम)  
मुंबई

58 लाख रिकॉर्ड मिले तो प्रमाण पत्र क्यों नहीं? मनोज जरांगे पाटिल का सरकार पर हमला, अलग मंत्रालय की उठाई मांग

Maratha Reservation Latest News: मनोज जरांगे पाटिल ने 30 मई से आंदोलन की चेतावनी दी है। कुणबी प्रमाण पत्रों के वितरण और हैदराबाद गजट को लेकर सरकार और जरांगे के बीच तकरार। जानें पूरी अपडेट।

गोरक्ष पोफली

Manoj Jarange Patil Protest: मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल एक बार फिर आक्रामक रुख अपना रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार के सामने स्पष्ट मांग रखी है कि प्रशासन को कुणबी समाज से संबंधित जो 58 लाख रिकॉर्ड्स मिले हैं, उनके आधार पर सभी संबंधित व्यक्तियों को तत्काल प्रमाण पत्र वितरित किए जाएं। जरांगे ने अपनी मांगों को विस्तार देते हुए मराठा समाज की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए एक स्वतंत्र मंत्रालय स्थापित करने की भी वकालत की है। उनका तर्क है कि पिछले शासकों ने मराठा समुदाय के हितों की अनदेखी की है, इसलिए वर्तमान सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।

सरकार के साथ चर्चा और मुख्य मुद्दे

30 मई से जालना जिले के अंतरावली सराटी में शुरू होने वाले प्रस्तावित आंदोलन की पृष्ठभूमि में, राज्य सरकार के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात कर चर्चा की। इस शिष्टमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और विधायक प्रसाद लाड शामिल थे। चर्चा के दौरान जरांगे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय से ऐसे निर्देश दिए गए हैं कि मराठवाड़ा में मिली प्रविष्टियों के आधार पर प्रमाण पत्र जारी न किए जाएं। उन्होंने सीधे तौर पर उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को संबोधित करते हुए कहा कि यदि वे हैदराबाद गजट पर आदेश दे दें, तो कल सुबह से ही कुणबी प्रमाण पत्रों का वितरण सुचारू रूप से शुरू हो सकता है।

सरकार का पक्ष और कानूनी अड़चनें

सरकार की ओर से राधाकृष्ण विखे पाटिल ने जानकारी दी कि अब तक राज्य में 39 लाख कुणबी प्रमाण पत्र बांटे जा चुके हैं और सरकार इसकी पारदर्शी सूची देने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि 1994 के शासकों की गलती के कारण मराठा समाज को ओबीसी में शामिल नहीं किया गया था। गजट के क्रियान्वयन पर उन्होंने स्पष्ट किया कि हैदराबाद गजट का मामला फिलहाल न्यायालय में है और उस पर स्थगन (Stay) लगा हुआ है। प्रशासन को डर है कि यदि अभी सतारा गजट लाया गया, तो उसे भी कानूनी चुनौती मिल सकती है।

मनोज जरांगे की चेतावनी

मनोज जरांगे ने सरकार से लिखित आश्वासन मांगा है कि प्रविष्टियों के आधार पर प्रमाण पत्र देने की प्रक्रिया किसी भी स्थिति में नहीं रोकी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे अपने आंदोलन के निर्णय पर अडिग हैं और जब तक मराठा समाज को उनका हक नहीं मिल जाता, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।

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