Maharashtra Revenue Department Rule: महाराष्ट्र सरकार ने राजस्व विभाग के कामकाज को अधिक प्रभावी और जन-केंद्रित बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राजस्व विभाग के राजपत्रित अधिकारियों की मनमानी प्रतिनियुक्ति (डेप्यूटेशन) पर लगाम लगा दी गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देशों के बाद राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नई नियमावली की घोषणा की है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखना और आम जनता को बिना किसी देरी के सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है।
पिछले काफी समय से यह देखा जा रहा था कि राजस्व, भूमि अभिलेख और पंजीकरण जैसे महत्वपूर्ण विभागों के अधिकारी लंबे समय तक अन्य विभागों या निगमों में प्रतिनियुक्ति पर चले जाते थे। इसके कारण राजस्व विभाग के वरिष्ठ पद रिक्त रह जाते थे, जिसका सीधा असर किसानों और आम नागरिकों के जरूरी कामों पर पड़ता था। प्रशासनिक कामकाज में आने वाली इस रुकावट को दूर करने के लिए अब नए कड़े नियम लागू कर दिए गए हैं।
नई नीति के अनुसार, राजस्व विभाग का कोई भी अधिकारी एक बार प्रतिनियुक्ति पूरी करने के बाद तुरंत दोबारा प्रतिनियुक्ति पर नहीं जा सकेगा। उन्हें अपने मूल विभाग में वापस आकर कम से कम 3 वर्ष तक अनिवार्य रूप से सेवा देनी होगी, जिसे 'कूलिंग ऑफ पीरियड' कहा जाएगा। इसके अलावा, शुरुआती प्रतिनियुक्ति की अवधि भी अधिकतम 3 वर्ष ही तय की गई है। विशेष परिस्थितियों में मूल विभाग की अनुमति से केवल 1 वर्ष का विस्तार मिल सकता है।
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यह नई नियमावली अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और भूमि अभिलेख विभाग के सभी राजपत्रित अधिकारियों पर लागू होगी। लेकिन, मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री या मंत्रियों के कार्यालय में कार्यरत अधिकारियों के लिए प्रतिनियुक्ति की अधिकतम सीमा 5 वर्ष रखी गई है, जिससे अधिक समय के लिए मुख्यमंत्री की विशेष अनुमति अनिवार्य होगी। इस निर्णय से राजस्व विभाग में अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों के कार्यों में तेजी आएगी।