सरकारी निर्माण का बजट बढ़ाने पर अफसरों की जवाबदेही तय।
नक्शे या काम में बदलाव के लिए सचिव की मंजूरी जरूरी।
बजट मंजूरी तक अधूरे काम की निविदा पर रोक।
Maharashtra PWD Order: सरकारी निर्माण कार्यों में ने बढ़ते खर्च पर नकेल कसने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार साफ कर दिया है कि अगर किसी ने भी सरकारी भवनों का बजट बढ़ाया तो संबंधित अफसर सीधे नपेंगे। सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग के नए आदेश के अनुसार निर्माण योजनाओं में बिना मंजूरी फेरबदल पर पूरी रोक लगा दी गई है और अधिकारियों को अब तय लागत में ही पूरा प्रोजेक्ट पूरा करना होगा।
यह भी स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि मूल नक्शे, मानकों या कार्यक्षेत्र में किसी भी तरह के आवश्यक बदलाव के लिए अब सचिव स्तर की अनुमति जरूरी होगी, ताकि वित्तीय अनुशासन बना रहे और तय सीमा में काम पूरा हो सके।
पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से जारी जीआर के अनुसार कई मामलों में मंजूर नक्शों में बदलाव कर सुरक्षा दीवार, सड़क और फर्नीचर जैसे कार्यों को अनुमान से बाहर रखा जा रहा है।
वहीं, अतिरिक्त क्षेत्रफल, फॉल्स सीलिंग, आंतरिक सड़कें, एसी सिस्टम और ट्रांसफॉर्मर जैसे काम उपयोगकर्ता विभाग की लिखित मंजूरी के बिना शामिल किए जा रहे हैं। इससे परियोजना की लागत बढ़ती है और भवन का समय पर उपयोग शुरू नहीं हो पाता।
शासन परिपत्र के अनुसार यदि तकनीकी अनुमान मंजूर लागत से अधिक है, तो महाराष्ट्र सरकार को तत्काल सूचित कर नई प्रशासनिक मंजूरी के लिए संशोधित प्रस्ताव भेजना होगा।
नई मंजूरी मिलने तक अधूरे काम की निविदा प्रक्रिया शुरू नहीं की जाएगी।
निर्माण के मानकों, मात्रा या कार्यक्षेत्र में बदलाव के लिए संबंधित विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव की लिखित अनुमति जरूरी होगी।
मुख्य अभियंता और अधीक्षक अभियंता को यह सुनिश्चित करना होगा कि बदलावों से मंजूर लागत न बढ़े। तकनीकी मंजूरी देने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि पूरा काम निर्धारित बजट में संपन्न हो और भवन उपयोग के लिए सौंपा जाए।
उच्चाधिकार समिति की नाराजगी के बाद जारी इन निर्देशों का सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को कड़ाई से पालन करना होगा। उल्लंघन कर संशोधित मंजूरी के प्रस्ताव भेजने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।