Government Land Allocation: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र लैंडबैंक डिजिटल प्रणाली से राज्य में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए सरकारी जमीन की तलाश और आवंटन की प्रक्रिया तेज होगी।
इससे परियोजनाओं के विकास को गति मिलेगी और वैकल्पिक वनीकरण के लिए जमीन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों के स्वामित्व वाली सरकारी जमीन की जानकारी अब एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है। इसके लिए महाराष्ट्र लैंडबैंक डैशबोर्ड विकसित किया गया है। मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद इस डिजिटल प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ किया गया।
सरकार का उद्देश्य विभिन्न विभागों के पास उपलब्ध जमीन से जुड़ी जानकारी को एकीकृत करना और जरूरत के अनुसार उसके उपयोग की प्रक्रिया को आसान बनाना है। लैंडबैंक के जरिए जमीन की उपलब्धता, स्थान और संबंधित विवरण एक ही मंच पर देखे जा सकेंगे।
मंत्रिमंडल बैठक के बाद राजस्व, वन और जमाबंदी विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री तथा अन्य मंत्रियों को इस प्रणाली की कार्यप्रणाली और इसके संभावित उपयोग की जानकारी दी।
महाराष्ट्र लैंडबैंक के माध्यम से सरकारी जमीन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी अब एक ही मंच पर उपलब्ध होगी। इसमें जमीन की उपलब्धता, क्षेत्रफल, वर्तमान उपयोग और उसके आवंटन से संबंधित विवरण दर्ज रहेगा। किसी परियोजना के लिए जमीन का चयन करते समय उसके सरकारी अभिलेखों के आधार पर जांच की जाएगी।
इसके साथ ही संबंधित अधिकारियों द्वारा मौके पर जाकर स्थल निरीक्षण भी किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान जमीन की वास्तविक स्थिति, उसका मौजूदा उपयोग और किसी तरह के अतिक्रमण या नियमों के उल्लंघन की जानकारी दर्ज की जा सकेगी।
जीपीएस आधारित जानकारी के जरिए जमीन का सटीक स्थान भी दर्ज होगा। इससे राज्य सरकार की जमीन के इस्तेमाल में पारदर्शिता बढ़ेगी और परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि का चयन करना आसान होगा।
प्रणाली में विभागों को जमीन के लिए ऑनलाइन मांग दर्ज करने, जांच, सत्यापन और मंजूरी की सुविधा मिलेगी। जीआईएस के जरिए जमीन का नक्शे के आधार पर विश्लेषण किया जा सकेगा।
तहसीलदार भी सरकारी और भोगवटादार वर्ग-2 की जमीन से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। जीपीएस लोकेशन, तारीख और समय के साथ स्थल निरीक्षण की जानकारी भी प्रणाली में दर्ज होगी।