महाराष्ट्र में अवैध खनन के बकाया जुर्माने के लिए ‘अभय योजना’ की तैयारी।
योजना का अध्ययन करने के लिए समिति गठित, 60 दिनों में रिपोर्ट देगी।
जुर्माना वसूली तेज करने और जब्त वाहनों के निपटारे पर जोर।
Maharashtra Abhay Yojana: महाराष्ट्र सरकार गौण खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन के मामलों में बकाया जुर्माने की वसूली तेज करने के लिए 'अभय योजना' लाने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्तावित योजना की व्यवहार्यता, शर्तों और कार्यान्वयन की प्रक्रिया का अध्ययन करने के लिए राजस्व विभाग ने एक समिति गठित की है। समिति को 60 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में शासनादेश भी जारी किया गया है।
राज्य सरकार की ओर से गठित इस समिति की अध्यक्षता नागपुर विभागीय आयुक्त करेंगे। समिति को प्रस्तावित अभय योजना के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर महाराष्ट्र सरकार को सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें योजना की शर्तें, लागू करने की अवधि और जुर्माना वसूली की प्रक्रिया जैसे मुद्दे शामिल होंगे।
राजस्व विभाग के सामने अवैध खनन और खनिजों के गैर-कानूनी परिवहन के मामलों में लगाए गए दंड की वसूली एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई मामलों में जुर्माने की रकम बकाया है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार यह विचार कर रही है कि क्या दंड की राशि में निर्धारित शर्तों के तहत राहत देकर संबंधित लोगों को एकमुश्त भुगतान का अवसर दिया जा सकता है।
हालांकि, जुर्माने में कितनी छूट मिलेगी और किन मामलों को योजना में शामिल किया जाएगा, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे की रूपरेखा तय की जा सकती है।
7 अगस्त 2026 को जारी अध्यादेश के अनुसार किए गए बदलावों में संपत्ति के मूल्य का दस गुना जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। ऐसे में प्रस्तावित अभय योजना की शर्तें तय करते समय दंड संबंधी मौजूदा प्रावधानों और उनकी कानूनी स्थिति पर भी ध्यान देना होगा।
प्रस्तावित योजना का उद्देश्य बकाया जुर्माने की वसूली में तेजी लाना, अदालतों में लंबित विवादों को कम करना और जब्त वाहनों के निपटारे की प्रक्रिया आसान बनाना है।
समिति की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार योजना को लागू करने, उसकी पात्रता और भुगतान की शर्तों पर अंतिम फैसला ले सकती है। फिलहाल, अभय योजना प्रस्तावित चरण में है और इसके अंतिम नियमों की घोषणा होना बाकी है।