राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)  
मुंबई

अवैध उत्खनन रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार सख्त, छह महीने में ड्रोन सर्वे; विरार हत्या मामले में 8 आरोपी गिरफ्त

Maharashtra Illegal Mining: महाराष्ट्र में अवैध खनन रोकने के लिए राजस्व मंत्री बावनकुले ने ड्रोन सर्वे और वॉर रूम बनाने की घोषणा की। विरार मामले में क्रशर बंद करने व मकोका के तहत कार्रवाई जारी है।

रूपम सिंह

Mumbai Illegal Mining Crackdown Chandrashekhar Bawankule: राज्य में अवैध उत्खनन और गौण खनिजों की चोरी रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने सख्त कार्रवाई का फैसला किया है। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विधानसभा में घोषणा की कि अगले छह महीने में संवेदनशील क्षेत्रों में ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन (ईटीएस) सर्वे कराया जाएगा। साथ ही निगरानी के लिए हाईटेक वॉर रूम और कानून में संशोधन भी किया जाएगा। सरकार मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), रायगढ़, पालघर, रत्नागिरी, पुणे, नासिक , नागपुर, छत्रपति संभाजीनगर और अमरावती समेत संवेदनशील इलाकों में चार एजेंसियों के माध्यम से सर्वे कराएगी। कोंकण क्षेत्र में गौण खनिजों की निगरानी के लिए रेलटेल के सहयोग से हाईटेक वॉर रूम भी स्थापित किया जाएगा।

विरार में हुई हत्या के मामले में सख्त कार्रवाई

मंत्री बावनकुले ने बताया कि विरार के अवैध उत्खनन और हत्या मामले में नौ में से आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि एक आरोपी फरार है। मामले में मकोका सहित गंभीर धाराएं लगाई गई हैं और 11 क्रशर बंद करने के आदेश दिए गए हैं। 10 करोड़ रुपये का जुर्माना रोकने के मामले में पूर्व तहसीलदार अमोल कोल्हे और एडी अमित सानप की जांच कर रिपोर्ट सदन में पेश की जाएगी।

मंत्री बावनकुले ने आगे कहा कि सरकार विधायकों की उच्चस्तरीय समिति गठित करेगी, जो तीन महीने में रिपोर्ट देगी। रेरा के बड़े प्रोजेक्टों के लिए रॉयल्टी भुगतान प्रमाणपत्र अनिवार्य करने की तैयारी है। अवैध खनन से जुड़े अपील मामलों में देरी रोकने और राजस्व हानि कम करने के लिए महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता में भी संशोधन प्रस्तावित किया जाएगा।

दोष दायित्व अवधि में एजेंसी की जिम्मेदारी

मुंबई- नासिक और मुंबई-गोवा राजमार्गों पर हुए भूस्खलन के बाद उठे सवालों पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि भूस्खलन प्राकृतिक कारणों से हुआ है और इसकी मरम्मत कराई जाएगी। बावनकुले ने स्पष्ट किया कि किसी भी निर्माण परियोजना के बाद एक निश्चित 'दोष दायित्व अवधि' (डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड) होती है।

इस अवधि में यदि निर्माण से जुड़ी किसी भी तरह की कोई तकनीकी खामी सामने आती है, तो संबंधित निर्माण एजेंसी उसे अपने खर्च पर ठीक करने के लिए जिम्मेदार होती है। मंत्री बावनकुले ने कहा कि ऐसी घटनाओं पर केवल आलोचना करने के बजाय तय प्रक्रिया के तहत जिम्मेदार एजेंसियां आवश्यक कार्रवाई कर रही हैं,

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