गिरफ्तारी की सांकेतिक फोटो (सोर्स: IANS)
मुंबई

शेयर बाजार में निवेश के नाम पर 1.30 करोड़ की धोखाधड़ी, महाराष्ट्र साइबर ने दो जालसाजों को दबोचा

Stock Market Scam Maharashtra: महाराष्ट्र साइबर विभाग ने शेयर बाजार में 1.30 करोड़ की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी का पर्दाफाश करते हुए दो जालसाजों को गिरफ्तार किया है और 50% से अधिक रकम फ्रीज कर ली है।

गोरक्ष पोफली

Highlights

  • महाराष्ट्र साइबर विभाग ने शेयर बाजार में 1.30 करोड़ की ऑनलाइन धोखाधड़ी का किया पर्दाफाश।

  • कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो जालसाजों को गिरफ्तार कर ठगी गई आधी रकम फ्रीज की।

  • आरोपियों के बैंक खाते देश के अन्य हिस्सों में हुए नौ और साइबर मामलों से जुड़े हैं।

Maharashtra Cyber Police: महाराष्ट्र साइबर विभाग ने 1.30 करोड़ रुपए की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले में सबसे अहम बात यह है कि ठगी गई रकम का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा फ्रीज कर लिया गया है।

महाराष्ट्र साइबर विभाग (जो राज्य में साइबर अपराध से जुड़े मामलों की नोडल एजेंसी है) ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी, निवेश घोटालों और साइबर अपराध से अर्जित धन के लेनदेन पर रोक लगाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है।

68 वर्षीय बुजुर्ग से ठगी का मामला

मामला एक 68 वर्षीय व्यक्ति से जुड़ा है, जिसे शेयर बाजार में निवेश पर भारी मुनाफे का लालच देकर करीब 1.30 करोड़ रुपए की ठगी का शिकार बनाया गया। धोखेबाजों ने अधिक रिटर्न का वादा कर पीड़ित को विभिन्न बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया। शिकायत मिलने के बाद महाराष्ट्र साइबर के नोडल साइबर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया।

तकनीकी और वित्तीय जांच का खुलासा

महाराष्ट्र राज्य साइबर ने तकनीकी और वित्तीय जांच शुरू की। बैंकिंग लेनदेन, धन के प्रवाह और विभिन्न खातों में रकम के हस्तांतरण का विस्तृत विश्लेषण किया गया। जांच में पता चला कि ठगी गई रकम में से 30 लाख रुपए दो ऐसे बैंक खातों में पहुंचे थे, जिन्हें प्रथम स्तर के लाभार्थी खातों (फर्स्ट लेयर बेनिफिशियरी अकाउंट) के रूप में इस्तेमाल किया गया था। बाद में इन खातों के जरिए रकम को अन्य खातों में भेजा गया, जिससे अवैध धन को छिपाने और आगे ट्रांसफर करने में मदद मिली।

आरोपियों की गिरफ्तारी और पहचान

कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र साइबर ने श्वेता विकल गुप्ता (41) और योगेश विवेकानंद देसाई (46) को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की। जांच में सामने आया कि श्वेता गुप्ता एमबीए डिग्री धारक हैं, जबकि योगेश देसाई एक बीमा कंपनी में सीनियर एग्जीक्यूटिव के पद पर कार्यरत है।

आरोप है कि दोनों ने अपने बैंक खातों का इस्तेमाल मनी म्यूल अकाउंट के रूप में होने दिया, जिनके जरिए साइबर धोखाधड़ी से हासिल धन को प्राप्त करने, ट्रांसफर करने और लेयरिंग का काम किया गया।

अन्य राज्यों के मामलों से जुड़ाव

आरोपियों के बैंक खातों की जांच के दौरान यह भी पता चला कि ये खाते दिल्ली, कर्नाटक, केरल, पुडुचेरी और त्रिपुरा में दर्ज नौ अन्य साइबर अपराध मामलों से भी जुड़े हुए हैं। इससे संकेत मिलता है कि इन खातों का इस्तेमाल देश के विभिन्न हिस्सों में हुए कई साइबर अपराधों में किया गया हो सकता है।

रकम की रिकवरी और आगे की जांच

महाराष्ट्र साइबर ने बताया कि त्वरित कार्रवाई और वित्तीय जांच के जरिए 1.30 करोड़ रुपए की ठगी गई रकम में से 50 प्रतिशत से अधिक राशि को फ्रीज करने में सफलता मिली है। फ्रीज की गई राशि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पीड़ित को वापस लौटाई जाएगी। साथ ही एजेंसी बाकी रकम का पता लगाने और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए जांच जारी रखे हुए है।

महाराष्ट्र साइबर ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति को कमीशन, आर्थिक लाभ या किसी अन्य लालच के बदले अपने बैंक खाते का उपयोग न करने दें। एजेंसी ने चेतावनी दी कि ऐसे खाते साइबर अपराधियों द्वारा मनी म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं, जिससे खाता धारक भी कानूनी कार्रवाई और आपराधिक जिम्मेदारी के दायरे में आ सकते हैं।

- एजेंसी इनपुट से

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