महाराष्ट्र पुलिस की बड़ी कामयाबी: साइबर ठगी से बचाए 1,700 करोड़ रुपये, 803 FIR दर्ज और हजारों खाते चिन्हित

Maharashtra Cyber Police: महाराष्ट्र पुलिस ने 'ऑपरेशन 1930' के तहत साइबर ठगों से नागरिकों के 1,700 करोड़ रुपये बचाए हैं। इस दौरान राज्य भर में 803 FIR दर्ज कर फर्जी खातों की जांच शुरू की गई।
Major success for Maharashtra Police: 1,700 crore saved from cyber fraud; 803 FIRs registered
महाराष्ट्र पुलिससोर्स-सोशल मीडिया
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Maharashtra Cyber Crime Action: महाराष्ट्र पुलिस ने समय रहते हस्तक्षेप कर और साइबर ठगों तक पहुंचने से पहले धनराशि के लेन-देन पर रोक लगा कर नागरिकों के 1,700 करोड़ रुपये से अधिक बचाए हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2026 के पहले सात महीनों में साइबर अपराध से जुड़ी दो लाख से अधिक शिकायतों का निपटारा किया गया।

पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े मामलों में मदद करने वाले लोगों और संस्थाओं के खिलाफ राज्यभर में खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए 803 प्राथमिकी दर्ज की हैं। यह कार्रवाई साइबर अपराध से जुड़े मामलों के लिए नोडल एजेंसी महाराष्ट्र साइबर द्वारा एक जुलाई को शुरू किए गए 'ऑपरेशन 1930: साइबर सेफ्टी' के तहत की गई।

3,597 खातों की भी पहचान

'प्रोएक्टिव प्राथमिकी' उस स्थिति में दर्ज की जाती है जब पुलिस किसी संज्ञेय अपराध का पता लगाती है या उसे सामने लाती है और इसके लिए पीड़ित की औपचारिक शिकायत का इंतजार नहीं करती। अधिकारियों ने बताया कि विश्लेषण के दौरान 57 बैंकों में 2,717 'लेयर-1 मनी म्यूल' खातों की पहचान की गई। उन्होंने बताया कि ये खाते करीब 12.57 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़े थे।

पुलिस के मुताबिक, इसके अलावा, 2,171 बैंक शाखाओं में 3,597 खातों की भी पहचान की गई, जिनसे करीब 89.30 करोड़ रुपये चेक के माध्यम से निकाले गये थे। पुलिस ने बताया कि इसके अलावा, 17,014 खातों और 10,075 एटीएम कार्ड के जरिये करीब 70.14 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।

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मनी म्यूल से लेकर फर्जी SIM तक

अधिकारियों ने बताया कि 7,312 साइबर अपराध शिकायतों से जुड़े 5,684 संदिग्ध सिम कार्ड की भी पहचान की गई है और इनकी जांच की जा रही है तथा संदिग्ध उपयोगकर्ताओं व सिम कार्ड विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

महाराष्ट्र में पुलिस की विभिन्न इकाइयों ने खुफिया सूचनाओं, आंकड़ों के विश्लेषण और क्षेत्रीय सत्यापन के आधार पर अभियान के दौरान चिन्हित लोगों व संस्थाओं के खिलाफ 803 प्राथमिकी दर्ज की। अधिकारियों के अनुसार, अब तक समय पर हस्तक्षेप करने और धनराशि के लेन-देन पर रोक लगाने की कार्रवाई के जरिए नागरिकों के 1,700 करोड़ रुपये से अधिक सुरक्षित किए जा चुके हैं।

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