महाराष्ट्र कांग्रेस ने DGP को ज्ञापन सौंपा (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

बिना कोर्ट आर्डर फोन की जांच और अवैध हिरासत, महाराष्ट्र कांग्रेस ने DGP को सौंपा ज्ञापन, दी आंदोलन की चेतावनी

Mumbai Police Illegal Detention: NEET विवाद पर महाराष्ट्र कांग्रेस ने DGP सदानंद दाते को ज्ञापन सौंपा। बिना कोर्ट ऑर्डर छात्रों के फोन जांचने व अवैध हिरासत का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।

गोरक्ष पोफली

Maharashtra Congress Submits Memorandum To DGP: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने गुरुवार को पुलिस महानिदेशक डीजीपी सदानंद दाते और मुंबई पुलिस आयुक्त को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें आरोप लगाया गया कि पूरे शहर और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में युवा छात्रों को बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया, उनकी प्राइवेसी का उल्लंघन किया गया और पुलिस ने उनके साथ मनमानी की।

कांग्रेस ने मांग की है कि हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को तुरंत और बिना शर्त रिहा किया जाए, 20 जुलाई से 22 जुलाई, 2026 के बीच दर्ज सभी 'मनगढ़ंत और बदले की भावना से की गई' एफआईआर पूरी तरह वापस ली जाएं, बिना अधिकार के फोन की तलाशी लेने और घरों में हिरासत में रखने में शामिल पुलिस अधिकारियों की गहन जांच हो और उन्हें तुरंत सस्पेंड किया जाए, साथ ही छात्रों और उनके परिवारों पर दबाव बनाने या उन्हें डराने-धमकाने का काम बंद करने के सख्त निर्देश दिए जाएं।

हर्षवर्धन सपकाल का बड़ा दावा

एमपीसीसी अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने पूर्व मंत्री नसीम खान, पार्टी विधायक भाई जगताप और पार्टी पदाधिकारी धनंजय शिंदे के साथ मिलकर 16 से 30 साल की उम्र के सैकड़ों युवाओं को हिरासत में लिए जाने को लेकर गंभीर चिंता जताई।

मेमोरैंडम के अनुसार, छात्र राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली में मौजूद समस्याओं और अव्यवस्था के खिलाफ शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे थे, तभी उन पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की। आरोप है कि पुलिस ने मुंबई में मेट्रो स्टेशनों, सार्वजनिक सड़कों और यहां तक ​​कि छात्रों के घरों सहित कई जगहों से 500 से 700 छात्रों को हिरासत में ले लिया, जबकि उनमें से कई तो विरोध-प्रदर्शन वाली जगह पर पहुंच भी नहीं पाए थे।

मौलिक अधिकारों के हनन का आरोप

कांग्रेस प्रमुख ने बताया कि 22 जुलाई, 2026 को मुंबई में कोई कर्फ्यू या धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू नहीं थी। इसके बावजूद, पुलिस ने केवल शक के आधार पर कार्रवाई की और शिवाजी पार्क, धारावी और चेंबूर सहित कई पुलिस स्टेशनों में छात्रों के खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज कीं।

राज्य कांग्रेस पार्टी ने मेमोरैंडम में आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने बिना किसी अदालती आदेश या कानूनी अधिकार के छात्रों के निजी मोबाइल फोन की जबरदस्ती जांच की। खबरों के अनुसार, छात्रों को मोबाइल डिवाइस के जरिए अपनी लाइव लोकेशन शेयर करने के लिए मजबूर किया गया, जो उनके मौलिक संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। पार्टी ने दावा किया कि धारावी, माहिम, जुहू, चेंबूर और दादर समेत कई पुलिस स्टेशनों में 200 से 300 छात्र अभी भी हिरासत में हैं।

छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बंद हो

हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि महाराष्ट्र में कानून का शासन चलता है और पुलिस की ऐसी मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर प्रशासन ने तुरंत दखल नहीं दिया, तो कांग्रेस पार्टी मजबूती से छात्रों के साथ खड़ी होगी और पूरे राज्य में जबरदस्त आंदोलन शुरू करेगी।

मेमोरेंडम में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन संविधान द्वारा दिया गया एक मौलिक अधिकार है। साथ ही चेतावनी दी गई कि युवाओं के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करने से उनकी भविष्य की शिक्षा, नौकरी की संभावनाओं और विदेश जाने के मौकों पर खतरा मंडरा सकता है खासकर इसलिए क्योंकि जिन लोगों पर केस दर्ज किए गए हैं, उनमें कई नाबालिग और युवतियां भी शामिल हैं।

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