Nominated Members In Local Bodies: महानगरपालिकाओं और नगरपालिकाओं की तर्ज पर अब जिला परिषद और पंचायत समितियों में भी मनोनीत यानी स्वीकृत सदस्यों की नियुक्ति की जा सकेगी।
ग्राम विकास विभाग की ओर से इस संबंध में अधिसूचना जारी किए जाने के बाद नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। संबंधित दलों के सदन में संख्याबल के आधार पर इन सदस्यों का मनोनयन किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर के राजनीतिक कार्यकर्ताओं के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी और विशेषज्ञ लोगों को भी अवसर मिलने की संभावना है।
राज्य की जिला परिषदों और पंचायत समितियों में कुल 1,005 मनोनीत सदस्य नियुक्त किए जाएंगे। 'महाराष्ट्र जिला परिषद एवं पंचायत समितियां (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2026' पहले ही विधानसभा में मंजूर हो चुका है। अब ग्राम विकास विभाग की अधिसूचना के बाद मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू होने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
राज्य की 34 जिला परिषदों में वर्तमान में 2,210 निर्वाचित सदस्य हैं। इनके साथ अब 201 मनोनीत सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। जिला परिषद में कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या के 10 प्रतिशत या न्यूनतम पांच सदस्य, इनमें जो सीमा लागू होगी, उसके अनुसार मनोनीत सदस्य नियुक्त किए जाएंगे।
इसी तरह राज्य की 301 पंचायत समितियों में 4,024 निर्वाचित सदस्य हैं। अब इनमें 804 मनोनीत सदस्यों की संख्या जुड़ेगी। पंचायत समिति में कुल सदस्यों की संख्या के 20 प्रतिशत या न्यूनतम एक सदस्य मनोनीत करने का प्रावधान किया गया है।
मनोनीत सदस्यों को जिला परिषद और पंचायत समिति के प्रशासनिक कामकाज में भाग लेने का अधिकार होगा, लेकिन उनके अधिकार सीमित रहेंगे। वे सदन में रखे गए प्रस्तावों पर मतदान नहीं कर सकेंगे।
इसके अलावा मनोनीत सदस्य जिला परिषद या पंचायत समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापति अथवा उपसभापति जैसे पदों के चुनाव के लिए पात्र नहीं होंगे। यानी सदन में उनकी भूमिका सलाह और सहभागिता तक सीमित रहेगी, जबकि निर्णय प्रक्रिया में उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होगा।
मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल संबंधित जिला परिषद या पंचायत समिति के कार्यकाल से जुड़ा रहेगा। परिषद या समिति का कार्यकाल समाप्त होते ही मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल भी समाप्त हो जाएगा। स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के चुनाव में टिकट नहीं मिलने या चुनाव हारने वाले कई इच्छुक कार्यकर्ताओं के अब मनोनीत सदस्य पद के लिए प्रयास करने की संभावना है।
खासकर पार्टी संगठन में सक्रिय कार्यकर्ताओं को सदन में प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए यह व्यवस्था राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
इसके चलते सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों में इच्छुकों की लॉबिंग और राजनीतिक जोड़तोड़ तेज होने की संभावना है। इस पूरी प्रक्रिया में दलों का संख्याबल, गुट पंजीकरण और पार्टी नेतृत्व की सिफारिश अहम भूमिका निभाएगी।
कुल मिलाकर, ग्राम विकास विभाग की इस व्यवस्था से जिला परिषद और पंचायत समितियों की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है। एक ओर विशेषज्ञों को स्थानीय प्रशासन में भागीदारी का अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए भी सदन में पहुंचने का एक नया रास्ता खुल गया है।
मनोनीत सदस्यों के नाम तय करते समय जिलाधिकारी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ पंजीकृत दलों और गुटों के तुलनात्मक संख्याबल को ध्यान में रखेंगे। संबंधित दल या गुट के नेता से विचार-विमर्श के बाद सदन में उनके संख्याबल के अनुपात में सदस्यों का मनोनयन किया जाएगा।
इसके लिए संबंधित दलों और गुटों को जिलाधिकारी के पास गुट का पंजीकरण कराना होगा। इससे महाराष्ट्र की प्रत्येक जिला परिषद और पंचायत समिति में गुट पंजीकरण तथा मनोनयन की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
मनोनीत सदस्य के रूप में केवल राजनीतिक कार्यकर्ताओं को ही अवसर नहीं मिलेगा। संबंधित क्षेत्र में अनुभव और विशेषज्ञता रखने वाले लोगों को भी प्रतिनिधित्व दिया जा सकेगा। वकील, शिक्षक, प्राध्यापक, समाजसेवक और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के कामकाज में शामिल करने का उद्देश्य इस व्यवस्था के पीछे बताया गया है।
इन सदस्यों के अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग जिला परिषद और पंचायत समितियों के प्रशासनिक कामकाज में सलाह तथा तकनीकी मार्गदर्शन के लिए किया जा सकेगा। इससे स्थानीय विकास कार्यों में विशेषज्ञों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है।