महाराष्ट्र चाइल्ड डेथ रिपोर्टिंग (सौ. सोशल मीडिया ) 
मुंबई

महाराष्ट्र में बाल मृत्यु की रिपोर्टिंग हुई अनिवार्य, निजी अस्पतालों को 24 घंटे में देनी होगी जानकारी

Maharashtra Child Death Reporting: महाराष्ट्र सरकार ने बाल मृत्यु के सटीक आंकड़े जुटाने के लिए निजी अस्पतालों में 0 से 5 वर्ष के बच्चों की मौत की रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी है।

अपूर्वा नायक

Maharashtra Child Death Reporting News: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी निजी अस्पतालों, प्रसूति गृहों और स्वास्थ्य संस्थानों के लिए बाल मृत्यु की रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी है। अब शून्य से 5 वर्ष के आयु वर्ग के किसी भी बच्चे की मृत्यु होने पर उसकी सूचना 24 घंटे के भीतर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी।

साथ ही प्रत्येक मामले की ऑनलाइन एंट्री सीआरएस और एचआईएमएस प्रणाली में करना आवश्यक होगा। इसी के साथ ही किसी तरह की लापरवाही पर प्रशासन की पैनी नजर भी रहेगी। सरकार का उद्देश्य बाल मृत्यु के सटीक आंकड़े जुटाकर स्वास्थ्य सेवाओं की कमियों की पहचान करना और रोकी जा सकने वाली मौतों में कमी लाना है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी किए गए शासनादेश में जिक्र किया गया है कि बाल मृत्यु राज्य की प्रमुख स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। यद्यपि महाराष्ट्र ने सतत विकास लक्ष्यों के तहत निधर्धारित नवजात व बाल मृत्यु दर के लक्ष्य हासिल कर लिए हैं, फिर भी बाल मृत्यु के प्रत्येक मामले का सटीक दस्तावेजीकरण और विश्लेषण आवश्यक माना गया है।

सरकार का मानना है कि यदि सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों में होने वाली सभी बाल मृत्यु की सही रिपोर्टिंग हो, तो जोखिम कारकों, उपचार में देरी, रेफरल प्रणाली की कमियों तथा स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद खामियों की पहचान कर समय रहते सुधार किया जा सकता है।

विभाग ने पाया कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में बाल मृत्यु की जानकारी नियमित रूप से दर्ज की जाती है, जबकि निजी स्वास्थ्य संस्थानों में कई मामलों की रिपोटिंग नहीं हो पाती या अधूरी रह जाती है। इससे वास्तविक आंकड़ों और सरकारी रिकॉर्ड में अंतर दिखाई देता है। इसी विसंगति को दूर करने के लिए सरकार ने सभी निजी स्वास्थ्य संस्थाओं के लिए ऑनलाइन रिपोर्टिंग व्यवस्था को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया है।

शासन निर्णय में स्वास्थ्य संस्थाओं की तय हुई जिम्मेदारी

शासन निर्णय में सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थाओं की जिम्मेदारी भी तय की गई है। सभी उपकेंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, ग्रामीण अस्पताल, उपजिला अस्पताल, जिला अस्पताल और मनपा क्षेत्र की स्वास्थ्य संस्थाओं को अपने अधिकार क्षेत्र के निजी अस्पतालों में हुई बाल मृत्यु की जानकारी एकत्र कर जिला स्तर पर भेजनी होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि एचएमआईएस प्रणाली में सभी मामलों की सही और पूर्ण प्रविष्टि की गई है।

इस तरह हैं नए दिशा-निर्देश

नए निर्देशों के अनुसार राज्य के सभी निजी अस्पतालों, मैटरनिटी होम, बाल अस्पतालों, मल्टी स्पेशियलिटी अस्पतालों व गैर-सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को प्रत्येक बाल मृत्यु का विवरण एचएमआईएस-आईएचआईपी प्रणाली मे दर्ज करना होगा।

साथ ही सीआरएस में पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए निधर्धारित प्रारूप में 24 घंटे के भीतर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग को सूचना देना भी अनिवार्य रहेगा। यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन निजी स्वास्थ्य संस्थानों का अभी तक एचएमआईएस-आईएचआईपी प्रणाली में पंजीकरण या मैपिंग नहीं हुई है, उन्हें संबंधित जिला स्वास्थ्य अधिकारी, जिला शल्य चिकित्सक अथवा मनया के चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी से यूजर आईडी और पासवर्ड प्राप्त कर तत्काल प्रणाली से जुड़ना होगा।

इसके बाद प्रत्येक माह स्वास्थ्य संबंधी सभी सूचकांकों की जानकारी ऑनलाइन भरना, उनका प्रमाणीकरण करना और मासिक रिपोर्ट संबंधित सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था को उपलब्ध कराना आवश्यक होगा, राज्य सरकार ने जिला और स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन को निजी अस्पतालों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए है, ताकि ऑनलाइन रिपोर्टिंग प्रणाली का प्रभाठी उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इसके अलावा राज्य और जिला स्वास्थ्य कार्यालयों के आधिकारिक ई-मेल पते भी सभी निजी स्वास्थ्य संस्थाओं को उपलब्ध कराए जाएंगे।

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