Maharashtra Health Department Fund: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के वित्तीय प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट में कई विभागों में बजट का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं होने और वित्तीय योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने संबंधित विभागों से तत्काल स्पष्टीकरण मांगते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
कैग की रिपोर्ट के अनुसार उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शहरी विकास विभाग को वर्ष के दौरान 24,610 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान मिला था। हालांकि विभाग 11,056 करोड़ रुपये, यानी करीब 45 प्रतिशत राशि खर्च नहीं कर सका। रिपोर्ट में इसे वित्तीय योजना और बजट के प्रभावी उपयोग के लिहाज से गंभीर विषय माना गया है।
स्वास्थ्य विभाग की स्थिति भी रिपोर्ट में चिंता का विषय बताई गई है। विभाग को 19,743 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन इसमें से 16,193 करोड़ रुपये, यानी लगभग 78 प्रतिशत राशि खर्च नहीं हो सकी। कैग ने इतने बड़े स्तर पर धनराशि के उपयोग न होने पर सवाल उठाते हुए बजट प्रबंधन में सुधार की आवश्यकता बताई है।
दूसरी ओर, महिला एवं बाल विकास विभाग ने निर्धारित बजट से अधिक व्यय किया। विभाग के लिए 29,693 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जबकि वास्तविक खर्च 33,267 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यानी विभाग ने निर्धारित बजट से 3,541 करोड़ रुपये अधिक खर्च किए। रिपोर्ट में इस अतिरिक्त व्यय का भी उल्लेख किया गया है।
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कैग की रिपोर्ट सामने आने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सभी संबंधित विभागों को रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर तत्काल स्पष्टीकरण देने और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा और जहां भी प्रशासनिक या वित्तीय स्तर पर कमी पाई जाएगी, वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट ने राज्य में बजट प्रबंधन, धनराशि के उपयोग और विभागीय जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।