Ajit Pawar Tribute In Maharashtra Budget Session: महाराष्ट्र विधानमंडल का बजट सत्र 2026 सोमवार को एक ऐसी दुर्लभ राजनीतिक एकता और गहरे शोक का गवाह बना, जो राज्य के इतिहास में कम ही देखने को मिलता है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों सदनों के वरिष्ठ नेताओं ने पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। नेताओं ने उन्हें केवल एक अनुभवी प्रशासक के रूप में ही नहीं, बल्कि एक ऐसे कद्दावर व्यक्तित्व के रूप में याद किया, जिसकी कमी ने राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में एक गहरा शून्य पैदा कर दिया है।
शोक प्रस्ताव पेश करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि यह क्षण अत्यंत भावनात्मक है और उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि उन्हें अजित पवार के लिए इस तरह बोलना पड़ेगा। फडणवीस ने अजित पवार को अपना करीबी दोस्त और मार्गदर्शक बताते हुए कहा कि उनका रिश्ता राजनीति से बहुत परे था। उन्होंने पवार के अनुशासन, सुबह जल्दी काम शुरू करने की दिनचर्या और उनकी तेज प्रशासनिक पकड़ को याद किया। फडणवीस ने यह भी रेखांकित किया कि पवार ने 11 बार राज्य का बजट पेश किया था और वह एक नया रिकॉर्ड बनाने के करीब थे, जो अब अधूरा रह गया।
विधान परिषद में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। एक दुखद दुर्घटना में अपने दो बेटों को खोने के अपने व्यक्तिगत दर्द का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा कि वह अजित पवार के परिवार सुनेत्रा ताई, पार्थ और जय के दुख को गहराई से समझते हैं। शिंदे ने कहा कि दादा मुझसे बड़े थे मैंने अपना एक बड़ा भाई खो दिया है। उन्होंने महा विकास अघाड़ी सरकार के दौरान साथ काम करने के दिनों को याद करते हुए पवार की स्पष्टता, अधिकारियों को विश्वास में लेने की क्षमता और शासन की गति को बनाए रखने के उनके दृढ़ संकल्प की सराहना की।
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शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने विधान परिषद को संबोधित करते हुए अजित पवार को एक कुशल और अथक लोकसेवक करार दिया। कोविड-19 महामारी के दौरान जब पवार वित्त मंत्री थे, तब के अनुभवों को साझा करते हुए ठाकरे ने कहा कि अभूतपूर्व चुनौतियों के बावजूद पवार ने सुनिश्चित किया कि महाराष्ट्र की प्रशासनिक मशीनरी सुचारू रूप से चलती रहे। ठाकरे ने भावुक होते हुए कहा कि मैंने एक प्यारा दोस्त खो दिया है और महाराष्ट्र ने एक कुशल नेता। उन्होंने गोपीनाथ मुंडे और आरआर पाटिल जैसे नेताओं के जाने का भी जिक्र करते हुए इसे राज्य का सामूहिक दुर्भाग्य बताया।
सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने अजित पवार की प्रशासनिक शक्ति, कार्य नैतिकता और राजनीतिक कद के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उनकी कार्यशैली और अनुशासन की गूंज आज भी महाराष्ट्र के गलियारों में सुनाई देती है। यह श्रद्धांजलि न केवल एक नेता को थी, बल्कि उस प्रशासनिक अनुशासन को भी थी जिसने दशकों तक राज्य को दिशा दी।