महाराष्ट्र राज्य विधानसभा (सोर्सः AI) 
मुंबई

हंगामेदार होगा राज्य विधानमंडल का मानसून सत्र, मुंबई में 22 जून से 10 जुलाई तक

Maharashtra Assembly का मानसून सत्र 22 जून से 10 जुलाई तक मुंबई में होगा। किसान कर्जमाफी, आरक्षण, कानून-व्यवस्था, पूरक मांगों और चुनावी वादों पर सरकार को घेरने की तैयारी है।

सूर्यप्रकाश मिश्र

Maharashtra Assembly Monsoon Session Will Be To Stormy: राज्य में मानसून ने अब तक भले ही दस्तक नहीं दी है,लेकिन महाराष्ट्र राज्य विधानसभा का मानसून सत्र हंगामेदार होने वाला है। इस बार मानसून अधिवेशन 22 जून से 10 जुलाई तक मुंबई में होगा। यह फैसला सोमवार को विधानसभा और विधानपरिषद मामलों की सलाहकार समिति की बैठक में लिया गया।

विधान भवन में हुई बैठक में विधान परिषद के सभापति प्रो. राम शिंदे, विधानसभा अध्यक्ष एडवोकेट राहुल नार्वेकर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, विधानसभा के उपाध्यक्ष अन्ना बंसोड़े, उच्च तंत्र शिक्षा एवं संसदीय चंद्रकांत दादा पाटिल, खाद्य आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, विधायक सुधीर मुनगंटीवार, दीपक केसरकर, नाना पटोले, जयंत पाटिल, डॉ. नीलम गोरहे, अनिल परब, प्रसाद लाड, हेमंत पाटिल, प्रवीण दरेकर , विक्रम काले, सतेज पाटिल, विधानमंडल सचिव जितेंद्र भोले और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

किसान, आरक्षण और कानून-व्यवस्था पर घिरेगी सरकार

उल्लेखनीय है कि राज्य विधानसभा और विधानपरिषद में विपक्ष का नेता नहीं है इसके बावजूद चुनावी वादों, बढ़ते कर्ज और सामाजिक मुद्दों को लेकर विपक्ष पूरी तैयारी में है, जिससे इस बार का सत्र हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष सबसे पहले सरकार को विधानसभा चुनाव के “पूरा कर्ज माफ” वादे पर घेरेगा। सरकार ने अब तक 2 लाख रुपये तक की ही कर्जमाफी दी है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि 2 लाख से ऊपर कर्ज वाले किसानों को पहले अतिरिक्त रकम भरनी पड़ेगी, जिससे ज्यादातर किसान योजना से बाहर हो जाएंगे। इसके साथ खाद-बीज की कमी, प्याज उत्पादकों की गिरती कीमतें और खरीफ सीजन की तैयारी पर भी सवाल उठेंगे। मराठवाड़ा और विदर्भ में बेमौसम बारिश, बाढ़ और लू की मार झेल रहे किसानों के लिए सरकार से “जलवायु-अनुकूल खेती” पैकेज की मांग भी उठने की उम्मीद है।

आरक्षण और सामाजिक मुद्दों पर टकराव

घर-घर जनगणना में OBC वर्ग के लिए अलग कॉलम न रखने पर OBC संगठनों की नाराजगी को विपक्ष जोर-शोर से उठा सकता है। इसके अलावा अनुसूचित जातियों के उपवर्गीकरण और समानांतर आरक्षण समाप्त करने के प्रस्ताव पर भी तीखी बहस हो सकती है।

कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार

राज्य में हत्या, लूट और साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं को लेकर विपक्ष सरकार की कानून-व्यवस्था पर हमला बोलेगा। मंत्री गिरीश महाजन के 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' संबंधी बयान को भी विपक्ष हथियार बना सकता है। राज्य पर 9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज होने के कारण मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सामने वित्तीय संतुलन साधने की बड़ी चुनौती है। सत्र में 57,509 करोड़ रुपये की पूरक मांगें रखी जाएंगी, जिनका उपयोग मेट्रो, सड़क, सिंचाई और वाढवन बंदरगाह जैसी परियोजनाओं में होगा।

मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना जैसी लोकप्रिय योजनाओं का भविष्य भी चर्चा में रहेगा। 12 विधेयक भी इस सत्र में पेश किए जाएंगे। किसान, आरक्षण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नोंक झोंक तय है।

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