महाराष्ट्र के महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ का अचानक इस्तीफा (सौजन्यः सोशल मीडिया) 
मुंबई

महाराष्ट्र के महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ का अचानक इस्तीफा, मुख्यमंत्री ने दी जानकारी

Advocate General Birendra Saraf Resigns: महाराष्ट्र के महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने व्यक्तिगत कारणों से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।सरकार ने उनसे अगली व्यवस्था तक कार्य करते रहने का अनुरोध किया।

आंचल लोखंडे

Mumbai News: राज्य के महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने व्यक्तिगत कारणों से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्य सरकार ने उनसे अगली व्यवस्था तक कार्य करते रहने का अनुरोध किया था। उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया है और जनवरी तक कार्य करते रहने पर सहमति व्यक्त की है, यह जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज (16 फरवरी) राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में दी। सराफ ने बॉम्बे हाईकोर्ट में 25 साल तक वकालत की है। उन्होंने गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, मुंबई से स्नातक की उपाधि प्राप्त की है।

सराफ ने एक जूनियर वकील के रूप में, उन्होंने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ के चैंबर में काम किया। 2000 में चंद्रचूड़ के बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत होने के बाद, सराफ पूर्व महाधिवक्ता रवि कदम के चैंबर में शामिल हो गए। 2020 में, सराफ को वरिष्ठ वकील नियुक्त किया गया। उन्होंने छह साल तक बॉम्बे बार एसोसिएशन के सचिव के रूप में कार्य किया है।

हाई-प्रोफाइल और विवादास्पद मामलों को संभाला

उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल और विवादास्पद मामलों को संभाला है। सितंबर 2020 में, उन्होंने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा बांद्रा स्थित उनकी संपत्ति के विध्वंस के खिलाफ दायर एक याचिका में कंगना रनौत का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया। उच्च न्यायालय ने विध्वंस नोटिस को रद्द कर दिया।

हैदराबाद गजट लागू करने के फैसले में सराफ की अहम भूमिका

बीरेंद्र सराफ जनवरी 2026 तक एडवोकेट जनरल के पद पर कार्यरत रहेंगे। मराठा समुदाय पर हैदराबाद गजट लागू करने के फैसले में सराफ की अहम भूमिका रही थी। बीरेंद्र सराफ ने अपने अब तक के करियर में कई हाई-प्रोफाइल और विवादास्पद मामलों को सफलतापूर्वक संभाला है। सराफ ने लॉकडाउन के दौरान बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के घर पर मुंबई नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई के मामले में हाईकोर्ट में कंगना का प्रतिनिधित्व किया था। जिसमें हाईकोर्ट ने कंगना के पक्ष में फैसला सुनाया और नगर निगम को कंगना को 2 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया।

बॉम्बे उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता

डॉ. बीरेंद्र सराफ देश के प्रमुख विधि विशेषज्ञों में से एक माने जाते हैं। वे बॉम्बे उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और 2022 से महाराष्ट्र राज्य के महाधिवक्ता के रूप में कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली कैबिनेट द्वारा की गई थी, जिसे राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मंजूरी दी थी। 2024 में महागठबंधन सरकार बनने के बाद भी उनकी नियुक्ति इस पद पर बनी रहेगी।

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