Mumba Devi and Siddhivinayak Temple Sutak Kaal (फोटो क्रेडिट-X) 
मुंबई

चंद्र ग्रहण 2026: मुंबईकरों के लिए अलर्ट! सूतक काल में बंद रहेंगे मंदिरों के कपाट, शुद्धिकरण के बाद होगी आरती

Lunar Eclipse 2026: 3 मार्च 2026 को लगने वाले चंद्र ग्रहण के कारण मुंबई के मुंबा देवी, सिद्धिविनायक और महालक्ष्मी मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। जानें सूतक और दर्शन का समय।

अनिल सिंह

Mumba Devi Temple Timings Chandra Grahan: साल 2026 का पहला खग्रास चंद्र ग्रहण मंगलवार, 3 मार्च को लगने जा रहा है, जिसका व्यापक असर मुंबई के प्रसिद्ध मंदिरों की समय सारिणी पर पड़ेगा। धार्मिक मान्यताओं और सूतक काल के कड़े नियमों के चलते दक्षिण मुंबई की कुलदेवी मुंबा देवी से लेकर प्रभादेवी स्थित सिद्धिविनायक मंदिर तक के कपाट भक्तों के लिए बंद रखे जाएंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, सूतक काल सुबह 6:23 बजे से शुरू होकर शाम 6:47 बजे ग्रहण की समाप्ति तक प्रभावी रहेगा।

सूतक काल के दौरान शुभ कार्यों और मूर्ति स्पर्श पर पूरी तरह पाबंदी होने के कारण मुंबई के अधिकांश मंदिरों ने दोपहर से ही दर्शन रोकने का निर्णय लिया है। ग्रहण के मोक्ष के बाद मंदिरों का शुद्धिकरण किया जाएगा, जिसके बाद ही श्रद्धालुओं को पुनः प्रवेश मिलेगा।

मुंबा देवी और बाबुलनाथ मंदिर: दर्शन के नियमों में बदलाव

मुंबा देवी मंदिर के ट्रस्टी हेमंत जाधव के अनुसार, मंगलवार सुबह 4 बजे मंगला आरती और 8 बजे की विशेष आरती के बाद मंदिर दोपहर 2 बजे तक ही दर्शन के लिए खुला रहेगा। इस दौरान भक्त माता के दर्शन तो कर सकेंगे, लेकिन स्पर्श पूजा और प्रसाद चढ़ाना वर्जित रहेगा। दोपहर 2 बजे से शाम 7 बजे तक मंदिर के कपाट पूरी तरह बंद रहेंगे। वहीं, प्रसिद्ध श्री बाबुलनाथ मंदिर सुबह 6 बजे से शाम 7 बजे तक बंद रहेगा। हालांकि, भक्तों की सुविधा के लिए शाम 7 से 9 बजे के बीच मंदिर परिसर के बाहर से दर्शन की अनुमति दी जाएगी, लेकिन फूल-बेलपत्र चढ़ाने पर रोक रहेगी।

सिद्धिविनायक और महालक्ष्मी मंदिर में सूतक का साया

प्रभादेवी के श्री सिद्धिविनायक मंदिर और कोस्टल रोड स्थित महालक्ष्मी मंदिर में भी ग्रहण के दौरान दर्शन प्रतिबंधित रहेंगे। सिद्धिविनायक मंदिर प्रशासन ने सूचित किया है कि सूतक काल शुरू होने के बाद नैवेद्य और आरती के समय में परिवर्तन किया गया है। दोपहर 3:10 बजे के बाद मुख्य गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। इसी प्रकार महालक्ष्मी मंदिर में भी ग्रहण काल के दौरान केवल मंत्रोच्चारण होगा, सामान्य भक्तों के लिए प्रवेश बंद रहेगा।

शुद्धिकरण के बाद खुलेंगे कपाट

हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार, ग्रहण काल में देव प्रतिमाओं को स्पर्श करना अशुभ माना जाता है। इसीलिए शाम 6:47 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद सभी प्रमुख मंदिरों में विशेष शुद्धिकरण और सफाई अभियान चलाया जाएगा। मूर्तियों को गंगाजल से स्नान कराने और मंदिर परिसर की धुलाई के बाद ही शाम की आरती होगी। इसके बाद ही भक्तों को मंदिर के भीतर जाकर दर्शन करने और प्रसाद ग्रहण करने की अनुमति दी जाएगी।

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