Kunal Kamra Sahyog Portal Legal Challenge: कॉमेडियन कुणाल कामरा ने सरकार के 'सहयोग' पोर्टल के खिलाफ मुंबई हाईकोर्ट का रुख कर इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर 'असंवैधानिक और अनुचित' हमला बताया है, क्योंकि यह अधिकारियों को सोशल मीडिया सामग्री हटाने की अनुमति देता है।
कॉमेडियन ने बुधवार को दायर अपनी याचिका में मुख्य रूप से आईटी नियमों और 'सहयोग' पोर्टल को चुनौती दी है। आईटी नियमों में अक्टूबर 2025 में संशोधन किया गया था। उन्होंने दावा किया था कि पोर्टल केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत 'अनिवार्य प्रक्रिया का पालन किये बिना, मनमाने ढंग से हटाने या अवरुद्ध करने के आदेश जारी करने का गैरकानूनी। रूप से अधिकार देता है।
'सहयोग' को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत उपयुक्त सरकार या उसकी एजेंसी द्वारा मध्यस्थों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया को स्वचालित करने के लिए विकसित किया गया था, ताकि किसी भी गैरकानूनी कार्य को करने के लिए उपयोग की जा रही जानकारी तक पहुंच को रोकने की सुविधा हो।
पोर्टल का उद्देश्य सभी अधिकृत एजेंसियों और मध्यस्थों को एक मंच पर लाना है, ताकि गैरकानूनी ऑनलाइन सूचनाओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके, अधिवक्ता मीनाज काकलिया के मार्फत दायर याचिका के अनुसार, आईटी नियमों के तहत नियम 3(1)(डी) और सहयोग पोर्टल भी प्रथम दृष्ट्या असंवैधानिक है, क्योंकि वे पूरी तरह से अस्पष्ट आधार पर इंटरनेट प्लेटफार्म पर सूचना को अवरुद्ध करने या उन्हें हटाने का अधिकार देते हैं।
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याचिका में इस बात पर जोर दिया गया कि ऐसी शक्तियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर असंवैधानिक और अनुचित प्रतिबंध के समान है। याचिका में कहा गया है कि ये नये तंत्र इंटरनेट पर मौजूद सभी सूचनाओं को मनमाने ढंग से हटाए जाने के लिए असुरक्षित बना देते हैं और ऐसी किसी भी कार्रवाई के खिलाफ कोई उपाय उपलब्ध नहीं कराते हैं। कामरा ने दावा किया कि इससे केंद्र और राज्य सरकारों के हजारों अधिकारियों को अनियंत्रित शक्ति मिल जाती है। याचिका पर आगामी दिनों में सुनवाई होने की संभावना है।