Kandivali Ambedkar Hospital: मुंबई में मानसून के दौरान डेंगू, लेप्टोस्पाइरोसिस और अन्य संक्रामक बीमारियों के बढ़ते मामलों के बीच कांदिवली स्थित भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल की एलिसा (ELISA) मशीन पिछले तीन महीनों से बंद पड़ी है। इससे डेंगू, लेप्टोस्पाइरोसिस, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसी बीमारियों की पुष्टिकरण जांच प्रभावित हो रही है। अस्पताल में नई मशीन शुरू होने का भी इंतजार किया जा रहा है।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मरीजों का प्रारंभिक इलाज फिलहाल रैपिड टेस्ट के आधार पर शुरू किया जा रहा है। हालांकि, बीएमसी की आधिकारिक निगरानी प्रणाली में केवल ELISA या RT-PCR जांच से पुष्टि किए गए मामलों को ही दर्ज किया जाता है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि पुष्टिकरण जांच में देरी के कारण वास्तविक मामलों की रिपोर्टिंग भी प्रभावित हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में सात से आठ मरीजों की रैपिड टेस्ट में डेंगू मरीजों की पुष्टि हुई थी। इनमें से कुछ मरीजों को एलिसा जांच के लिए निजी प्रयोगशालाओं में भेजना पड़ा। निजी लैब में एक जांच के लिए ₹2,500 से ₹4,000 तक खर्च करना पड़ रहा है, जिससे मरीजों और उनके परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
यह भी पढ़ें:- घाटकोपर में बनेगा अण्णा भाऊ साठे का भव्य स्मारक, फडणवीस और शिंदे ने किया भूमिपूजन, 2029 तक होगा तैयार
मुंबई अस्पताल सूत्रों का कहना है कि नई एलिसा मशीन शुरू होने के बाद जांच सेवाएं सामान्य होने की उम्मीद है। फिलहाल मरीजों और चिकित्सकों को सीमित संसाधनों के बीच काम करना पड़ रहा है। ऐसे में अस्पताल में जल्द नई मशीन चालू होने की मांग तेज हो गई है, ताकि संक्रामक रोगों की समय पर पुष्टिकरण जांच हो सके और मरीजों को निजी लैब का सहारा न लेना पड़े।