Juhu Beach Plastic Waste Pollution: मानसून के दौरान अरब सागर में उठे तेज ज्वार के बाद रविवार को जुहू बीच पर बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा, थर्माकोल, बोतलें और घरेलू मलबा बहकर आने से समुद्र तट कचरे से पट गया।
कई हिस्सों में सीवेजयुक्त पानी फैलने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। पर्यावरणविदों का कहना है कि समुद्र में पहुंच रहा प्लास्टिक ज्वार के साथ बार-बार तट पर लौट रहा है, जिससे समुद्री जीवों, तटीय पारिस्थितिकी और जनस्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बढ़ता जा रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान नदियों, नालों और गटरों के जरिए बड़ी मात्रा में प्लास्टिक और अन्य कचरा अरब सागर में पहुंच जाता है। ज्वार आने पर यही कचरा दोबारा समुद्र तट पर लौट आता है। उनका मानना है कि यह स्थिति शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था की कमियों को उजागर करती है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्लास्टिक कचरा समुद्री जीवों और पक्षियों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। कई बार समुद्री जीव प्लास्टिक को भोजन समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनकी मौत तक हो जाती है। प्रदूषित पानी तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचा रहा है और बीच पर आने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
दूसरी ओर रविवार को पैदा हुई स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियात के तौर पर बीच पर आवाजाही कुछ समय के लिए रोक दी। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए लाइफगार्ड और पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया, ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।
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पर्यावरणविदों ने जुहू बीच को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए ठोस कचरा प्रबंधन, नालों में कचरा जाने से रोकने के प्रभावी उपाय, नियमित सफाई अभियान और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया है। उनका कहना है कि दीर्घकालिक प्रयासों के बिना इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।