Jayant Patil (सोर्सः सोशल मीडिया) 
मुंबई

ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में ही बीता सदन का कामकाज, जयंत पाटिल ने सरकार को घेरा

Jayant Patil: महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र के दौरान जयंत पाटिल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदन का अधिकांश समय ध्यानाकर्षण प्रस्तावों में ही बीत रहा है।

सूर्यप्रकाश मिश्र

Maharashtra Assembly: जयंत पाटिल ने महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम सप्ताह के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि सदन का अधिकांश समय ध्यानाकर्षण पुनर्गठन में ही बीत रहा है।

उन्होंने सरकार की घेराबंदी पर सवाल लंबित हुए कहा कि सरकार बहुमत के सहारे ब्रेक कर रही है। यह अधिवेशन कम और “ध्यानाकर्षण पुनर्गठन का सत्र” ज्यादा नजर आ रहा है, जहां नियमों को स्थगित कर एक ही दिन में 20 से 30 मुद्दे उठाए जा रहे हैं। पाटिल ने आरोप लगाए कि इनमें से अधिकतर मुद्दे सत्ताधारी दल के सदस्यों द्वारा ही उठाए जा रहे हैं।

मंत्री और अधिकारी मंजूर

पाटिल ने कहा कि आम नागरिक अपनी मेहनत की कमाई से टैक्स भरता है और उसी पैसे से यह अधिवेशन चलता है, लेकिन कई बार सदन में मंत्री और अधिकारी मंजूर रहते हैं। उन्होंने मांग की कि सदन में उठाए गए हर मुद्दे पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और जिन प्रश्नों का तत्काल उत्तर संभव नहीं है, उनके लिखित जवाब दिए जाने चाहिए। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर चिंता जताते हुए पाटिल ने कहा कि एक ओर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस “ऑल इज वेल” का दावा करते हैं, जबकि दूसरी ओर सतारा में पुलिस द्वारा एक मंत्री के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना परिस्थितियों की देनदार को सौंप दी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी स्थिति बनी रही तो भविष्य में पुलिस प्रशासन प्रदाताओं को भी नजरअंदाज कर सकता है।

गैस आपूर्ति में देरी और कालाबाजा

किसानों के मुद्दे को लंबित हुए पाटिल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और गैस संकट का सीधा असर अंगूर और केले के किसानों पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गैस आपूर्ति में देरी और कालाबाजारी की स्थिति पर भी उन्होंने सरकार से जवाब मांगा।

इसके साथ ही उन्होंने दिवंगत नेता अजीत पवार के कथित दुर्घटना की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि इस मामले में ड्यूटी दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि जनता के मन में उठ रही शंकाओं और कुसंशयों को दूर किया जा सके।

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