Mere Krishn Play Nehru Centre Worli: रिमझिम फुहारों के बीच मायानगरी मुंबई इस वीकेंड पूरी तरह से कृष्णमयी हो उठी है। गलियों में गूंजते 'गोविंदा आला रे' के तरानों, दही हांडी के ढोल-ताशों और गणेशोत्सव की शुरुआती आहटों के बीच सांस्कृतिक आयोजकों ने श्रद्धालुओं और कला-प्रेमियों के लिए भक्ति और संगीत की एक अनूठी महफिल सजाई है। इस जन्माष्टमी वीकेंड पर मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी ठहरकर कान्हा की मुरली की धुन और उनके जीवन दर्शन के रंग में रंगने को तैयार है।
विले पार्ले के हरे-भरे स्वातंत्र्यवीर सावरकर उद्यान में 5 सितंबर की शाम एक अलग ही रूहानी रूप लेने जा रही है। मशहूर गायिका गायत्री अय्यर के नेतृत्व में 'बृदावना' नाम से एक विशेष 'भजन जैमिंग' का आयोजन किया गया है। यहाँ कोई बड़ा मंच या दर्शकों का दायरा नहीं होगा; बस भक्ति संगीत के अनुरागी साथ बैठकर मीरा और सूरदास के अमर पदों को अपनी आवाज देंगे। सांझ ढलते ही पीपल के पत्तों की सरसराहट के बीच जब हर कण्ठ से कृष्ण-नाम निकलेगा, तो यह शाम शहर को एक अद्भुत आत्मिक शांति का अहसास कराएगी।
कान्हा की भक्ति बांसुरी के बिना अधूरी मानी जाती है। इसी एहसास को रूहानी रूप देने के लिए प्रसिद्ध बांसुरी वादक वर्षा जैन 6 सितंबर को 'द पैवेलियन बाय कोरम' में अपनी जादुई उंगलियों से सुर छेड़ेंगी। उनके साथ सितार, वायलिन, तबला और गिटार की जुगलबंदी होगी। शास्त्रीय और लोक धुनों के इस फ्यूजन में जब बाँसुरी से राधा-कृष्ण के प्रेम और भक्ति के तराने निकलेंगे, तो श्रोताओं को लगेगा मानो वे मुंबई शहर की चहल-पहल से दूर सीधे वृंदावन के किसी कुंज-गली में पहुँच गए हैं।
वर्ली स्थित नेहरू सेंटर ऑडिटोरियम 5 से 7 सितंबर के बीच एक भव्य दृश्य-काव्य का गवाह बनेगा। 'मेरे कृष्ण' शीर्षक से मंचित होने जा रहा यह नाटक 21 भव्य दृश्यों में बंटा है। थिएटर, शास्त्रीय नृत्य, कर्णप्रिय संगीत और आधुनिक मल्टीमीडिया तकनीक का ऐसा संगम विरले ही देखने को मिलता है। माखनचोर बाल-कृष्ण की नटखट लीलाओं से लेकर कुरुक्षेत्र के मैदान में भगवद्गीता के अमर उपदेश और द्वारकाधीश के भव्य रूप तक, यह नाटक दर्शक को एक अलौकिक यात्रा पर ले जाएगा।
संस्कृति, कला और भक्ति का यह अद्भुत त्रिवेणी संगम इस सप्ताहांत मुंबईकरों को एक अविस्मरणीय अनुभव देने के लिए पूरी तरह तैयार है।