इस्कॉन मंदिर (फोटो-सोशल मीडिया) 
मुंबई

नवी मुंबई इस्कॉन खारघर की अनूठी पहल, आध्यात्मिक चेतना के साथ युवाओं को मिल रहा रोजगार और वैदिक शिक्षा

Navi Mumbai News: नवी मुंबई के खारघर स्थित इस्कॉन मंदिर अध्यात्म के साथ-साथ युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण पलायन रोकने के लिए कुटीर उद्योग व वैदिक शिक्षा केंद्र का संचालन कर रहा है।

सूर्यप्रकाश मिश्र

Maharashtra ISKCON Kharghar News: भारत सहित विश्व भर में आध्यात्मिक ज्ञान का प्रचार-प्रसार करने वाला अंतरराष्ट्रीय संस्थान इस्कॉन युवकों को आत्मनिर्भर बनाने में भी योगदान दे रहा है। नवी मुंबई के खारघर में पिछले वर्ष राज्य का सबसे बड़ा इस्कॉन मंदिर बना। यह भव्य दिव्य मंदिर जहां लोगों में आध्यात्मिक चेतना जगा रहा है, वहीं इस मंदिर संस्थान द्वारा लोगों को कुटीर उद्योग के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है।

पलायन रोकने में मदद

भीमाशंकर की पहाड़ी के नीचे स्थित गांवों के लोगों को कुटीर उद्योग स्थापित करने में मदद की जा रही है, उन्हें प्रशिक्षण के साथ सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। इस्कॉन का उद्देश्य गांवों से लोगों का पलायन रोकना और गांवों में ही रोजगार पैदा करना है। इसका सैकड़ों महिला पुरुष लाभ ले रहे हैं। इस्कॉन मंदिर के चेयरमैन सूरदास का कहना है कि भारत के ग्रामीण इलाकों में आत्मनिर्भर बनाना बेहद जरूरी है, क्योंकि आत्मनिर्भरता से ही सनातन की बुनियाद को मजबूत किया जा सकता है।

महाभारत-रामायण की जानकारी देने वाला म्यूजियम

खारघर मंदिर में विशाल म्यूजियम है, लोग यहां आकर आनंदित हो रहे हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को महाभारत, रामायण और वैदिक विधियों से अवगत कराया जा रहा है। इस्कान मंदिर के चेयरमैन सूरदास महाराज ने कहा कि लोगों के पास आजकल पढ़ने का मौका नहीं मिल रहा है, ऐसे में लोग यहां आकर वैदिक, कल्चर म्यूजियम का आनंद ले सकते हैं। 9 एकड़ में फैले इस मंदिर परिसर में आयुर्वैदिक क्लिनिक बनाया गया है। एम्बुलेंस के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी चिकित्सा सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। सूरदास महाराज का मानना है कि लोगों की दिनचर्या बदल गयी है, लोगों को शुद्ध भोजन नहीं मिल रहा है। जबकि शुद्ध भोजन से हमारे जीवन में भक्ति, बुद्धि और वैभव बढ़ जाता है। लोगों को शुद्ध भोजन मिले, इस पर इस्कॉन संस्थान का विशेष फोकस है।

मंदिर में शुद्ध सात्विक भोजन

इस्कॉन मंदिर में शुद्ध भोजन परोसा जाता है, इसके लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण भोजनालय बनाया गया है। इसी के साथ यहां पर बच्चों और महिलाओं के लिए लाइब्रेरी बनाई गई है। जहां बच्चे अध्ययन कर अपनी मंजिल हासिल कर रहे हैं। पिछले 14 सालों से इस मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है।

चेयरमैन सूरदास का कहना है कि अब हम लोग महाराष्ट्र में स्थित एक विजन को कंप्लीट कर रहे हैं। इस मंदिर के माध्यम से जनहित के बहुत से कार्य चल रहे हैं। सूरदास महाराज ने बताया कि हमारे अंतरराष्ट्रीय कृष्ण भावना संघ के संस्थापक प्रभुपाद जी ने लोगों के हित में मिशन शुरू किया, जो लगभग 60 साल से अनवरत चल रहा है।

वैदिक पाठ्यक्रम के लिए किया गया कॉलेज का निर्माण

इस्कॉन के अधिकांश मंदिरों में ऐसे ही प्रयास किए जा रहे हैं, जहां आने वाले भक्तों को आध्यात्मिक ज्ञान के साथ साथ मानसिक शांति की भी अनुभूति हो सके। अन्य मंदिरों से हट कर इस मंदिर का निर्माण कराया जा रहा है।

नवी मुंबई क्षेत्र एजुकेशन का हब बन रहा है, लेकिन वेद पुराण की शिक्षा प्रदान करने वाले विद्यालय न के बराबर हैं। इसी कमी को देखते हुए इस्कॉन संस्थान ने पारंपरिक वैदिक पाठ्यक्रमों के लिए कॉलेज का निर्माण कराया है, इसमें शिक्षित होकर बच्चे देश दुनिया में लोगों को धर्म के प्रति आस्थावान बना रहे हैं।

इस मंदिर में हर दिन सुबह शाम कार्यक्रम होते रहते हैं। सूरदास महाराज ने कहा कि यहां पर शिक्षा, धार्मिक, चिकित्सा क्षेत्र में लोग सेवाएं दे सकते हैं. कॉलेज में पार्टिसिपेशन कर सकते हैं, ग्रंथ आदि पढ़ सकते हैं।

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