प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

'100 बार किया फोन, नहीं मिली दूतावास से मदद', दुबई में फंसे भारतीय पर्यटक ने सोशल मीडिया पर बयां किया दर्द

Iran Israel War Indian Stranded Dubai: अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के तनाव के बीच दुबई में फंसे मुंबई के पर्यटक जयेश ठक्कर ने दूतावास और एयरलाइंस पर गंभीर आरोप लगाए है।

आकाश मसने

Indian Embassy Dubai Helpline Issue: पश्चिमी एशिया में मंडराते युद्ध के बादलों और अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब आम नागरिकों और पर्यटकों पर दिखने लगा है। ताजा मामला दुबई का है, जहां एक भारतीय पर्यटक पिछले तीन दिनों से फंसा हुआ है। मुंबई के रहने वाले जयेश ठक्कर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वे और उनके जैसे कई अन्य भारतीय दुबई में फंसे हुए हैं और भारत लौटने के उनके तमाम प्रयास विफल साबित हो रहे हैं।

दूतावास की हेल्पलाइन पर गंभीर आरोप

पेशे से सेबी (SEBI) पंजीकृत शोध विश्लेषक जयेश ठक्कर ने आरोप लगाया है कि संकट की इस घड़ी में भारतीय दूतावास से उन्हें कोई सहायता नहीं मिल रही है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने दुबई में भारतीय दूतावास द्वारा उपलब्ध कराए गए हेल्पलाइन नंबरों पर 100 से अधिक बार कॉल किया, लेकिन एक बार भी किसी ने फोन नहीं उठाया। ठक्कर ने लिखा कि वह ठहरने के लिए भुगतान करने को तैयार हैं, लेकिन उन्हें मार्गदर्शन देने वाला कोई नहीं है।

आसमान छू रहा फ्लाइट्स का किराया

जयेश ने विमानन कंपनियों की मनमानी पर भी चिंता जताई है। उनके अनुसार, फुजैराह और मुंबई के बीच स्पाइसजेट और इंडिगो जैसी एयरलाइंस के टिकटों की कीमतें 80,000 से लेकर 1 लाख रुपए प्रति यात्री तक पहुंच गई हैं। वहीं, एमिरेट्स (Emirates) की उड़ानों के लिए 40,000 से 50,000 रुपए तक वसूले जा रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि इतनी महंगी टिकट बुक करने के बाद भी राहत नहीं मिल रही है। ठक्कर ने बताया कि उड़ान भरने से महज 6 से 7 घंटे पहले फ्लाइट्स रद्द कर दी जाती हैं। इसके बाद रिफंड मिलने में 48 से 72 घंटे का समय लग रहा है, जिससे यात्रियों का पैसा फंस गया है और वे दूसरी फ्लाइट बुक करने में असमर्थ हैं।

काेई मुफ्त आवास या होटल नहीं

सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों के बीच जयेश ने स्पष्ट किया कि दुबई में फंसे यात्रियों को कोई मुफ्त आवास या होटल नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह की सुविधाएं केवल अबू धाबी में फंसे लोगों के लिए उपलब्ध होने की खबरें हैं।

दिल के मरीज पिता के लिए बढ़ी चिंता

यह स्थिति जयेश के लिए भावनात्मक रूप से भी काफी चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि उनके साथ उनके पिता भी हैं जो हृदय रोग से पीड़ित हैं। उन्होंने भावुक संदेश में लिखा, "हम यहां एक सुखद अनुभव के लिए आए थे और अच्छी यादों के साथ वापस जाना चाहते हैं।" उनकी इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने विदेश मंत्रालय और संबंधित अधिकारियों को टैग करना शुरू कर दिया है ताकि इन फंसे हुए भारतीयों की जल्द से जल्द सुरक्षित घर वापसी हो सके।

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