India Energy Strategy 2026: पिछले दो महीनों में दुनिया ने दशकों के सबसे गंभीर ऊर्जा संकटों में से एक का सामना किया है। खास कर जिस तरह से अमेरिका और इजरायल ने मिल कर ईरान पर हमला बोला है।
इस वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और वैश्विक एलएनजी व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा गुजरता है, काफी प्रभावित हुआ है। कुछ ही हफ्तों में कच्चे तेल की कीमत लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 126 डॉलर तक पहुंच गई, यानी 72% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, शिपिंग लागत में तेज बढ़ोतरी हुई और साथ ही एलएनजी आपूर्ति प्रभावित हुई है।
ऐसे माहौल में भारत की प्रतिक्रिया लचीलापन और दूरदर्शी तैयारी का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर सामने आई। दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल होने और ऐतिहासिक रूप से लगभग 88% कच्चे तेल की आपूर्ति होर्मुज मार्ग से जुड़ी होने के बावजूद, भारत ने आम उपभोक्ताओं के दैनिक जीवन को लगभग पूरी तरह सामान्य बनाए रखा।
पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर रहे, देशभर में एलपीजी की आपूर्ति निर्बाध जारी रही और कहीं भी खुले तौर पर कमी, राशनिंग या दैनिक जीवन में व्यवधान देखने को नहीं मिला।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यह समन्वित नीतिगत योजना और दीर्घकालिक ऊर्जा तैयारी का परिणाम है, जिसने वैश्विक अस्थिरता का सीधा असर घरों तक पहुंचने से रोका, संकट पर नजर रखने वाले कई अर्थशाखियों ने कहा कि जहां कई देशों ने कच्चे तेल की बढ़ी कीमतों का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डाल दिया।