Hussain Dalwai On Nitish Kumar (फोटो क्रेडिट-X)  
मुंबई

हुसैन दलवई का बड़ा दावा: बिहार में बनेगा भाजपा का सीएम, निशांत कुमार की एंट्री, नीतीश कुमार का चैप्टर खत्म

Hussain Dalwai On Nitish Kumar: हुसैन दलवई ने कहा कि निशांत कुमार के जेडीयू में आने से नीतीश कुमार की राजनीति खत्म हो गई है और अब बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा।

अनिल सिंह

Nishant Kumar Entry Bihar: बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के जनता दल (यूनाइटेड) में औपचारिक प्रवेश के बाद सियासी गलियारों में बयानों का दौर तेज हो गया है। महाराष्ट्र से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद हुसैन दलवई ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया है कि बिहार में अब 'नीतीश कुमार का चैप्टर' पूरी तरह समाप्त हो चुका है। दलवई के अनुसार, निशांत कुमार का राजनीति में आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आगामी समय में बिहार की कमान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के हाथों में होगी और राज्य को भाजपा का मुख्यमंत्री मिलेगा।

हुसैन दलवई ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में कोई बड़ी हैसियत नहीं रह जाएगी और वे केवल एक उपमुख्यमंत्री के पद तक ही सीमित रह सकते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के अधिकारों के बीच के बड़े अंतर को रेखांकित करते हुए कहा कि सारा कामकाज मुख्यमंत्री ही चलाता है, जबकि डिप्टी सीएम के पास कोई विशेष संवैधानिक अधिकार नहीं होते। दलवई के अनुसार, नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाने की यह कोशिश असल में उनकी राजनीतिक पारी के अंत की शुरुआत है।

स्पीकर ओम बिरला और अविश्वास प्रस्ताव पर रुख

हुसैन दलवई ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि स्पीकर को हमेशा निष्पक्ष रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि ओम बिरला अक्सर भाजपा के इशारों पर काम करते रहे हैं, जो कि लोकतंत्र के लिए सही नहीं है। दलवई ने संभावना जताई कि यदि चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार की पार्टी के सदस्य इस प्रस्ताव के दौरान तटस्थ रहते हैं, तो यह प्रस्ताव पारित हो सकता है। यह बयान केंद्र की गठबंधन सरकार के भीतर संभावित दरार की ओर इशारा करता है।

ममता बनर्जी और राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के अपमान के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए दलवई ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद सर्वोच्च है और प्रोटोकॉल का पालन न करना एक गंभीर गलती है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि ममता बनर्जी का पक्ष सुने बिना स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होगी। दलवई ने माना कि संवैधानिक मर्यादाओं का पालन हर हाल में किया जाना चाहिए, चाहे इसके पीछे कोई भी राजनीतिक कारण क्यों न हो।

सिनेमा और चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल

राहुल गांधी के 'द केरल स्टोरी 2' वाले बयान का समर्थन करते हुए दलवई ने कहा कि वर्तमान में कुछ फिल्म निर्माता समाज में विभाजन पैदा करने वाली फिल्में बना रहे हैं। उन्होंने 'मदर इंडिया' जैसी पुरानी फिल्मों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले सिनेमा समाज को जोड़ता था, लेकिन अब इसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। दलवई ने कहा कि कई जगहों पर लोगों के नाम मतदाता सूची से जानबूझकर काटे गए हैं और ऐसा लगता है कि चुनाव आयोग अब एक स्वतंत्र संस्था के बजाय सरकार के इशारों पर काम कर रहा है।

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