मंत्री नरहरि झिरवाल ने रांजणगांव की मिथेनॉल कंपनी का लाइसेंस बहाल किया।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कंपनी का लाइसेंस रद्द किया था।
936 कंपनियों की जांच में 309 में अनियमितताएं मिली थीं।
Narhari Zirwal has stayed the action taken by Tukaram Mundhe: महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे की कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
पुणे में जहरीली शराब का मामला सामने आने के बाद मुंढे ने रांजणगांव औद्योगिक क्षेत्र की एक मिथेनॉल कंपनी का लाइसेंस रद्द कर दिया था। हालांकि, खाद्य एवं औषधि प्रशासन मंत्री नरहरि झिरवाल ने इस फैसले पर रोक लगाते हुए कंपनी का लाइसेंस बहाल कर दिया है।
इस फैसले के बाद राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि संबंधित कंपनी राष्ट्रवादी कांग्रेस के एक प्रभावशाली नेता के करीबी लोगों से जुड़ी है और इसी वजह से मंत्री ने उसे राहत दी। हालांकि, मंत्री नरहरि झिरवाल ने किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव से इनकार किया है।
पुणे शहर में जहरीली शराब का मामला सामने आने के बाद एफडीए ने राज्यभर में मिथेनॉल का उत्पादन और भंडारण करने वाली कंपनियों की जांच शुरू की थी। जून में चलाए गए इस अभियान के तहत कुल 936 कंपनियों की जांच की गई। जांच के दौरान 309 कंपनियों में नियमों का उल्लंघन और गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने कार्रवाई की थी। नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए गए, जबकि 70 कंपनियों के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने के आदेश दिए गए थे।
आयुक्त के फैसले के खिलाफ 22 कंपनियों ने मंत्री नरहरि झिरवाल के समक्ष अपील दाखिल की थी। इनमें पुणे शहर के रांजणगांव औद्योगिक क्षेत्र की मिथेनॉल कंपनी भी शामिल थी।
बताया जा रहा है कि अन्य कंपनियों की अपील पर सुनवाई लंबित रहने के दौरान मंत्री ने रांजणगांव की कंपनी की अपील पर तत्काल सुनवाई की और लाइसेंस रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी। इसके बाद कंपनी का लाइसेंस बहाल कर दिया गया।
इस घटनाक्रम ने एफडीए की कार्रवाई और मंत्री के फैसले के बीच मतभेद को सार्वजनिक चर्चा का विषय बना दिया है। हालांकि, कंपनी को राहत देने के पीछे राजनीतिक दबाव होने का आरोप अभी विवादित है। मंत्री ने इससे इनकार किया है।