एकनाथ शिंदे (सोर्स: सोशल मीडिया) 
मुंबई

अभी फॉर्म वापस मत लेना... उपमुख्यमंत्री शिंदे के एक आदेश से महायुति में खलबली, अनिकेत तटकरे की राह में रोड़ा?

Kokan Seat Dispute: कोकण विधान परिषद चुनाव में नया मोड़! महायुति में यह सीट राकांपा के पास होने के बावजूद एकनाथ शिंदे ने शिवसेना उम्मीदवारों को नामांकन वापस न लेने को कहा है।पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

गोरक्ष पोफली

Konkan MLC Seat Dispute: महाराष्ट्र की राजनीति में कोकण विधान परिषद की सीट को लेकर महायुति (भाजपा, शिवसेना और राकांपा) के भीतर एक नया और दिलचस्प मोड़ आ गया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के एक हालिया आदेश ने गठबंधन के सहयोगियों के बीच संदेह और चर्चाओं का माहौल गरमा दिया है।

समझौता और अनिकेत तटकरे की उम्मीदवारी

महायुति में हुए सीटों के बंटवारे के अनुसार, कोकण विधान परिषद की यह महत्वपूर्ण सीट राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के खाते में गई है। इस निर्णय के बाद, सुनील तटकरे के बेटे अनिकेत तटकरे यहाँ से महायुति के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल करने वाले हैं।

एकनाथ शिंदे का चौंकाने वाला आदेश

इस पूरे घटनाक्रम में ट्विस्ट तब आया जब उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपनी पार्टी के उन नेताओं को, जिन्होंने पहले ही इस सीट के लिए नामांकन दाखिल कर दिया है, 4 जून तक अपना आवेदन वापस न लेने का स्पष्ट निर्देश दिया है। यह आदेश राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि इससे पहले शिंदे ने अपने विधायकों और पदाधिकारियों के साथ बैठक कर उन्हें गठबंधन की मर्यादा का पालन करने की सख्त सलाह दी थी।

शिवसेना की दावेदारी और स्थानीय समीकरण

शिवसेना इस सीट के लिए शुरू से ही काफी आग्रही रही है, क्योंकि रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग जैसे क्षेत्रों में उनका संख्याबल अन्य सहयोगियों की तुलना में काफी अधिक है। राज्य के मंत्री भरत गोगावले अपने बेटे विकास गोगावले के लिए यहाँ से टिकट चाह रहे थे। इसी बीच, शिवसेना विधायक महेंद्र दलवी की बेटी जुइली दलवी ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना पर्चा दाखिल कर दिया है।

पालकमंत्री पद का असली खेल?

सूत्रों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री शिंदे द्वारा आवेदन वापस न लेने की सूचना के पीछे रायगड के पालकमंत्री (Guardian Minister) पद का गहरा राजनीतिक गणित छिपा हो सकता है। ऐसी चर्चा है कि शिवसेना चाहती है कि यदि वे राकांपा के अनिकेत तटकरे की उम्मीदवारी का समर्थन करते हैं, तो बदले में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को रायगड का पालकमंत्री पद शिवसेना के लिए छोड़ना चाहिए।

हालांकि इस विषय पर प्राथमिक बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक किसी अंतिम निर्णय पर मुहर नहीं लगी है। उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि विधान परिषद की सीट और उम्मीदवारी पर अंतिम फैसला अंतिम चर्चा के बाद ही लिया जाएगा। अब 4 जून, यानी नामांकन वापसी की आखिरी तारीख तक महायुति के भीतर खींचतान और मोलभाव का यह दौर जारी रहने की संभावना है।

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