Pahalgam Terror Attack News: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना मुख्य नेता एकनाथ शिंदे ने मानवता और वीरता की मिसाल पेश करने वाले शहीद सैयद आदिल हुसैन शाह के परिवार से किया अपना वादा पूरा कर दिया है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के दौरान पर्यटकों की जान बचाते हुए अपनी शहादत देने वाले आदिल के परिवार को शिवसेना की ओर से एक नया पक्का घर और 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।
शहीद आदिल के परिजनों के लिए बनाए गए इस नए घर का नाम 'आनंद नाथ सदन' रखा गया है। यह नाम एकनाथ शिंदे के राजनीतिक गुरु और शिवसेना के दिवंगत कद्दावर नेता धर्मवीर आनंद दिघे की स्मृति से प्रेरित है। शिंदे ने इस नाम के जरिए यह संदेश दिया कि जिस तरह आनंद दिघे ने अपना जीवन समाज सेवा के लिए समर्पित किया, उसी तरह आदिल ने भी मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है।
पहलगाम हमले की पहली बरसी के अवसर पर आयोजित इस भावुक कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री शिंदे ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिरकत की। उन्होंने शहीद को नमन करते हुए कहा, "आदिल केवल एक परिवार का बेटा नहीं था, बल्कि वह देश की अस्मिता को बचाने वाला एक सच्चा योद्धा था। धर्म, भाषा और पंथ की दीवारों को तोड़कर उसने जो साहस दिखाया, वह इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है।"
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकवादियों ने निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाकर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। उस समय निहत्थे आदिल हुसैन ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए आतंकियों से भिड़ने और उनकी बंदूक छीनने का प्रयास किया था। उनके इस साहसी हस्तक्षेप के कारण कई पर्यटकों की जान तो बच गई, लेकिन इस संघर्ष में आदिल ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। घटना के तुरंत बाद एकनाथ शिंदे ने श्रीनगर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था और शहीद के परिवार को सहारा देने का संकल्प लिया था।
यह भी पढ़ें: मंच साझा करने से किया परहेज, पर सुनेत्रा पवार की जीत के लिए एक हुए फडणवीस और सुप्रिया सुले
नया घर और सहायता पाकर शहीद आदिल का परिवार भावुक हो उठा। उनकी बहन और भाई ने नम आंखों से उपमुख्यमंत्री शिंदे का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे ने एक बड़े भाई की तरह अपना वादा निभाया (Shinde Fulfills Promise)। उन्होंने कहा कि 'आनंद नाथ सदन' उनके लिए केवल ईंट-पत्थर का मकान नहीं, बल्कि आदिल की वीरता को मिला सम्मान और उनके भविष्य का सहारा है।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के इस कदम ने न केवल कश्मीर और महाराष्ट्र के बीच भावनात्मक सेतु का काम किया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि शिवसेना देशभक्ति और मानवता के प्रति अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि मानती है।