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मुंबई

परिमैच सट्टेबाजी केस में ED का बड़ा एक्शन! 12 ठिकानों पर छापे, ₹3,000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा

Mumbai ED Raid: ईडी ने अवैध सट्टेबाजी ऐप 'परिमैच' से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 4 राज्यों में 12 ठिकानों पर छापेमारी की। जांच में ₹3,000 करोड़ की अवैध कमाई का खुलासा हुआ है।

रूपम सिंह

ED Raid Parimatch Betting App Mumbai: ईडी के मुंबई क्षेत्रीय कार्यालय ने अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म 'परिमैच' और उसके सहयोगियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रंग मामले में, बुधवार को एक बड़ा अभियान चलाया है।

एजेंसी ने महाराष्ट्र (5), दिल्ली-एनसीआर (4), राजस्थान (2) और गुजरात (1) समेत चार राज्यों में कुल 12 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। जांच में खुलासा हुआ है।

एक साल में 3,000 करोड़ से अधिक की कमाई का दावा

ED की जांच में सामने आया है कि साइप्रस स्थित परिमैच प्लेटफॉर्म ने कथित अवैध सट्टेबाजी कारोबार के जरिए एक साल में 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की। एजेंसी ने दर्ज FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी।

जांच के दौरान कथित तौर पर यह पता चला कि सट्टेबाजी से जुड़े यूजर्स के पैसों को इकट्ठा करने और ट्रांसफर करने के लिए फर्जी बैंक खातों, पेमेंट गेटवे और फिनटेक कंपनियों का जटिल नेटवर्क तैयार किया गया था। आरोप है कि यूजर्स द्वारा जमा की गई रकम को सामान्य कारोबारी लेनदेन का रूप देकर दूसरे खातों में डायवर्ट किया जाता था।

कैश से हवाला तक फैला नेटवर्क

ED के मुताबिक, इस कथित नेटवर्क में कैश मैनेजमेंट सिस्टम (CMS) एजेंटों, बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क, किराना दुकानों और स्थानीय खुदरा कारोबारियों का भी इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी को संदेह है कि CMS के जरिए जमा की गई नकदी को RTGS ट्रांसफर के साथ एडजस्ट किया जाता था।

इसके बाद रकम को कथित तौर पर अवैध हवाला चैनलों, फर्जी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और विदेशी प्रेषण के माध्यम से भारत से बाहर भेजा जाता था। एजेंसी अब इस पूरे वित्तीय नेटवर्क और धन के अंतिम लाभार्थियों की जानकारी जुटा रही है।

संदेह में कई सीए और सीएस

इस पूरे खेल में कैश मैनेजमेंट सिस्टम एजेंटों, बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट नेटवर्क, किराना स्टोर और स्थानीय खुदरा दुकानों का गलत इस्तेमाल किया गया। सीएमएस के जरिए एकत्र नकदी को आरटीजीएस ट्रांसफर के साथ एडजस्ट किया जाता था

और बाद में इस रकम को अवैध हवाला चैनलों, फर्जी विदेशी प्रत्यक्ष निवेश और विदेशी प्रेषण के जरिए भारत से बाहर भेज दिया जाता था। इस काम में मदद करने के संदेह में कई सीए और सीएस के ठिकानों पर भी तलाशी ली गई है।

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