Delhi Neet Protest Rohit Pawar Demands Judicial Inquiry: देश की राजधानी दिल्ली में नीट NEET पेपर लीक मामले को लेकर देश भर के छात्रों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन और उस दौरान हुए लाठीचार्ज ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरदचंद्र पवार गुट के नेता रोहित पवार ने इस घटना को लेकर सरकार और दिल्ली पुलिस पर तीखे प्रहार किए हैं।
उन्होंने विशेष रूप से उन अज्ञात हमलावरों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है, जो पुलिस की वर्दी में न होकर सिविल ड्रेस में थे और छात्रों के साथ हिंसक व्यवहार कर रहे थे।
रोहित पवार ने पत्रकारों से बातचीत में इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ ऐसे लोग भी सक्रिय थे, जो पुलिस विभाग का हिस्सा नहीं लग रहे थे। पवार के अनुसार, ये लोग चप्पल और सैंडल पहने हुए थे और सिविल ड्रेस में थे, लेकिन उनके हाथों में कील लगे हुए डंडे थे।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ये लोग कौन थे जिन्हें छात्रों पर हमला करने की छूट दी गई थी? पवार ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों और विशेष रूप से छात्राओं को निशाना बनाने वाले ये लोग भाजपा और आरएसएस के कार्यकर्ता थे। उन्होंने मांग की है कि ऐसे लोगों के चेहरे चिन्हित किए जाने चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि उन्हें हिंसा फैलाने का आदेश किसने दिया था।
रोहित पवार ने दिल्ली पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस के कुछ विभागों ने छात्रों के साथ बेहद निंदनीय व्यवहार किया। पवार ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि प्रदर्शन स्थल पर दिल्ली पुलिस की उन गाड़ियों को लाया गया था जो पहले से खराब थीं और चलने की स्थिति में नहीं थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन गाड़ियों को जानबूझकर तोड़ा गया ताकि जनता के बीच यह संदेश भेजा जा सके कि छात्रों ने हिंसा की है और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है। पवार ने इसे छात्रों को बदनाम करने की एक पूर्व-नियोजित साजिश करार दिया और मांग की कि न्यायिक जांच में इस बिंदु को भी शामिल किया जाए कि आखिर लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया और FIR किस आधार पर दर्ज की गई।
छात्रों के साथ हुए इस दुर्व्यवहार के खिलाफ कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिस पर कोर्ट ने एक जांच पैनल गठित करने का निर्देश दिया है।
रोहित पवार ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इस पैनल में एक सम्मानित रिटायर्ड जज को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि जांच की निष्पक्षता बनी रहे। उन्होंने जोर देकर कहा कि जब तक पूरी जांच नहीं होती, तब तक 'दूध का दूध और पानी का पानी' नहीं होगा।
पवार ने स्पष्ट किया कि पुलिस प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों और छात्राओं के साथ बदसलूकी करने वाले इन सिविल ड्रेस धारी गुंडों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपना अधिकार मांग रहे छात्रों पर इस तरह के हमले किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किए जा सकते।
रोहित पवार का यह बयान दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, क्योंकि अब प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के पीछे बाहरी तत्वों की संलिप्तता के गंभीर आरोप लग रहे हैं।