देवेंद्र फडणवीस (सोर्सः सोशल मीडिया) 
मुंबई

महाराष्ट्र में जाति सत्यापन के लिए AI और ब्लॉकचेन का होगा इस्तेमाल, CM फडणवीस ने दिए निर्देश

CM On Caste Verification With AI: महाराष्ट्र में जाति सत्यापन प्रक्रिया ब्लॉकचेन और AI आधारित होगी। मुख्यमंत्री फडणवीस ने ऑनलाइन, पारदर्शी प्रणाली, आदिवासी योजनाओं और वनाधिकार पर भी जोर दिया।

आलोक उमाकृष्ण

CM On Caste Verification With AI Blockchain: मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अनुसूचित जनजाति जाति सत्यापन प्रक्रिया को ब्लॉकचेन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से अधिक पारदर्शी, सुरक्षित, विश्वसनीय और नागरिकों के लिए सरल बनाया जाएगा। उन्होंने महाराष्ट्र राज्य जनजाति सलाहकार परिषद की 52वीं बैठक में पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन करने और डिजिटल सत्यापन प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए।

AI से होगी दस्तावेजों की जांच

मुख्यमंत्री ने कहा कि एआई आधारित प्रणाली के जरिए दोहरे आवेदनों की पहचान, दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच और सत्यापन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाए। साथ ही पारधी समाज के लिए आदिवासी, वन और राजस्व विभाग संयुक्त शिविर लगाकर आवश्यक प्रमाणपत्र वितरित करें। उन्होंने आदिवासी उपयोजना के लिए जनसंख्या के अनुपात में निधि उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।

योजनाओं का दायरा बढ़ाने का प्रयास

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आदिवासी विकास विभाग की विभिन्न शैक्षणिक और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों और परिवारों तक पहुंचाने के लिए आय सीमा की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वर्तमान आय सीमा बढ़ाकर न्यूनतम चार लाख रुपये करने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए, ताकि अधिक संख्या में आदिवासी छात्र-छात्राएं सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।

इसके अलावा मुख्यमंत्री ने जाति प्रमाणपत्र से जुड़े कानून में आवश्यक संशोधन करने, विभागों में लंबे समय से रिक्त पड़े पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया शुरू करने तथा जाति सत्यापन और अन्य न्यायालयीन मामलों के प्रभावी संचालन के लिए विशेष विधि विशेषज्ञों की नियुक्ति करने के निर्देश भी दिए। उनका कहना है कि इन सुधारों से योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाया जा सकेगा।

वनाधिकार और ग्रामसभाओं पर भी फोकस

मुख्यमंत्री ने वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, स्थानीय आदिवासियों को मत्स्य व्यवसाय में प्राथमिकता तथा बांस, तेंदूपत्ता और आपटा जैसे लघु वनोपज पर ग्रामसभाओं के अधिकारों की समीक्षा के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न विभागों के समन्वय से आदिवासी योजनाओं के समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया।

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