बॉम्बे हाई कोर्ट (फोटो सोर्स - गूगल इमेज) 
मुंबई

Bombay High Court का बड़ा फैसला: कंपनी की गलती से नहीं रुकेगी कर्मचारियों की पेंशन, EPFO को लगायी फटकार

Bombay High Court ने EPFO के उच्च पेंशन मामलों में बड़ा फैसला सुनाया है। अब केवल दस्तावेज की कमी के आधार पर कर्मचारियों के दावे खारिज नहीं किए जा सकेंगे, जिससे लाखों लोगों को राहत मिली है।

अपूर्वा नायक

Bombay High Court Ruling EPFO Higher Pension: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के उन सदस्यों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है, जो अपनी उच्च पेंशन (Higher Pension) के दावों को लेकर लंबे समय से परेशान थे।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि केवल इसलिए कर्मचारियों के पेंशन दावे खारिज नहीं किए जा सकते क्योंकि उनके नियोक्ता (कंपनी) ने कुछ दस्तावेज जमा नहीं किए हैं।

क्या था पूरा मामला और कोर्ट की नाराजगी?

  • अदालत के सामने यह बात आई थी कि कई कर्मचारियों ने उच्च पेंशन पाने के लिए आवेदन किया था। इन कर्मचारियों ने अपने हिस्से का योगदान भी बढ़ाकर जमा किया था और उनके पास फॉर्म 3ए, ईपीएफ पासबुक और बैंक स्टेटमेंट जैसे मजबूत सबूत भी मौजूद थे।
  • इसके बावजूद, EPFO ने उनके आवेदन केवल इस आधार पर खारिज कर दिए कि उनकी पूर्व कंपनियों ने फॉर्म 6ए या कुछ पुराने चालान जमा नहीं किए थे। बॉम्बे हाईकोर्ट ने EPFO के इस अड़ियल रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।

कर्मचारी को नहीं भुगतना होगा खामियाजा

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी ने अपनी तरफ से सभी आवश्यक शर्तों को पूरा कर लिया है, तो उसे पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायाधीशों ने तर्क दिया कि दस्तावेजों का रिकॉर्ड रखना और उन्हें जमा करना नियोक्ता की जिम्मेदारी होती है। यदि नियोक्ता ने अपना कर्तव्य नहीं निभाया है, तो उसका खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना चाहिए। यह पूरी तरह से अनुचित है कि एक कर्मचारी को उसकी मेहनत की कमाई या उसके कानूनी अधिकार से सिर्फ इसलिए दूर रखा जाए क्योंकि कंपनी ने प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी नहीं की।

EPFO को कोर्ट के निर्देश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने EPFO को भविष्य के लिए सख्त निर्देश दिए हैं...

  • दस्तावेजों के लिए खुद पहल करे EPFO: अदालत ने कहा कि अगर कोई दस्तावेज गायब है, तो EPFO को स्वयं कंपनी से संपर्क करना चाहिए और रिकॉर्ड मांगना चाहिए, न कि कर्मचारी को परेशान करना चाहिए।
  • उपलब्ध सबूतों की जांच: EPFO को अब केवल फॉर्म जमा न होने के आधार पर आवेदन खारिज करने के बजाय, कर्मचारी द्वारा प्रस्तुत अन्य उपलब्ध सबूतों (जैसे पासबुक और बैंक स्टेटमेंट) की जांच करनी होगी।
  • तथ्यों के आधार पर फैसला: अब EPFO को कर्मचारी के दावों को मेरिट के आधार पर परखना होगा और सभी सबूतों को देखने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेना होगा।

पेंशनभोगियों के लिए बड़ी जीत

यह फैसला उन लाखों कर्मचारियों के लिए जीत की तरह है, जो निजी क्षेत्र में काम करने के दौरान कंपनी बंद होने या प्रबंधन की लापरवाही के कारण अपने ईपीएफ रिकॉर्ड को लेकर चिंतित थे। कोर्ट के इस फैसले से अब EPFO की मनमानी पर रोक लगेगी और पेंशन पाने की राह आसान होगी। यह निर्णय न केवल प्रक्रियात्मक बाधाओं को दूर करेगा, बल्कि यह भी स्थापित करेगा कि सामाजिक सुरक्षा के दावों में संस्था की जवाबदेही सर्वोपरि है।

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