Bombay High Court Relief Teachers BLO Duty: भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) द्वारा बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की ड्यूटी न करने पर दर्ज हो रही एफआईआर से परेशान होकर, मुंबई शहर के विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
शिक्षकों का मुख्य सवाल है कि वे स्कूलों में बच्चों को पढ़ाएं या चुनाव ड्यूटी करें। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम में लापरवाही बरतने और गायब रहने के आरोप में, मुंबई के विभिन्न स्कूलों के 100 से अधिक शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
इस मामले पर सुनवाई करते हुए बॉम्बे उच्च न्यायालय ने निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रविंद्र वी घुगे और न्यायमूर्ति गौतम ए। अंखड़ की पीठ ने, चुनाव आयोग द्वारा जारी कारण बताओ नोटिसों पर अगली सुनवाई तक कोई है। दंडात्मक कार्रवाई न करने का मौखिक आश्वासन दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार, 19 जून को तय की गई।
यह याचिकाएं मलाड कॉस्मोपॉलिटन एजुकेशन ट्रस्ट (चिल्ड्रन एकेडमी), गैर-सहायता प्राप्त विद्यालय फोरम और पीड़ित शिक्षकों द्वारा दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग के जून में जारी नियुक्ति आदेशों को चुनौती देते हुए तर्क दिया है कि, बीएलओ की ड्यूटी मुख्य रूप से सरकारी और अर्ध-सरकारी कर्मचारियों की होनी चाहिए।
निजी शिक्षकों की तैनाती से स्कूलों का कामकाज और छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। उन्होंने आयोग के 5 जून, 2025 के निर्देशों का भी हवाला दिया जिसमें बाहरी लोगों की नियुक्ति केवल असाधारण परिस्थितियों में ही करने की बात कही गई है। चुनाव आयोग के वकील आशुतोष कुंभकोणी ने भी कोर्ट को भरोसा दिया है कि अगली सुनवाई तक कोई कड़ा कदम नहीं उठाया जाएगा।