बॉम्बे हाईकोर्ट बीएमसी अदालत की अवमानना, अश्विनी भिडे सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

BMC को सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का नोटिस, कमिश्नर पर 5 लाख का जुर्माना; हाईकोर्ट से भी झटका

Bombay High Court BMC Contempt: अदालत की अवमानना मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने BMC की अतिरिक्त समय याचिका खारिज की। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा, आदेश का पालन किए बिना राहत का आवेदन स्वीकार नहीं।

रूपम सिंह

Highlights

  • हाईकोर्ट ने बीएमसी की अतिरिक्त राहत की मांग खारिज की।

  • कोर्ट ने आदेश पालन के लिए एक दिन की भी मोहलत देने से इनकार किया।

  • अदालत ने कहा- पहले आदेश का पालन करें, फिर राहत मांगें।

Bombay High Court BMC Contempt of Court Justice: मुंबई के बोरीवली में बेस्ट बस स्टेशन के लिए तय जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की है और कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने बीएमसी कमिश्नर और उनके स्टाफ के सैलरी पर रोक लगा दी है।

साथ ही अतिरिक्त समय मांगने की याचिका को खारिज करते हुए 5 लाख का कॉस्ट (जुर्माना) भी लगाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने यह निर्णय लिया है। अदालत ने पूछा है कि कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।

मराठी अनुवाद पर भड़का कोर्ट

सैलरी पर रोक 1 दिसंबर 2026 तक या कारण बताओ नोटिस का फैसला होने तक जारी रहेगी। पीठ ने बीएमसी अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए संकेत दिया कि अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत हो सकती है।

पीठ ने यह दलील भी खारिज कर दी कि मराठी दस्तावेजों के अंग्रेजी अनुवाद में समय लगा। पीठ ने सवाल उठाया कि हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी डॉ. तांबे हैं। क्या अदालत यह मान ले कि उन्हें मराठी भाषा नहीं आती? हम उन्हें जेल भेजेंगे, तब उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश का महत्व समझ में आ जाएगा।

अतिरिक्त राहत की मांग खारिज

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि बीएमसी कोर्ट के आदेशों का पालन किए बिना अतिरिक्त राहत की मांग नहीं कर सकता। पहले आदेश का पालन किया जाए और उसके बाद उचित राहत के लिए आवेदन दाखिल किया जा सकता है।

30 दिन की मोहलत देने से इनकार

सुनवाई के दौरान मुंबई बीएमसी ने अदालत के आदेश का पालन करने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मांगा था। हालांकि, पीठ ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि इस मामले में एक दिन का भी अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

अवमानना के मामले में अदालत सख्त

अदालत ने मामले को न्यायिक आदेशों की अवमानना से जुड़ा बताया। पीठ के रुख से स्पष्ट है कि संबंधित आदेश का पालन किए बिना बीएमसी को राहत नहीं मिलेगी। अदालत ने महानगरपालिका को पहले आदेश का अनुपालन करने और उसके बाद ही उचित राहत के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया है।

पंजाब चुनाव से पहले ED की गतिविधि तेज, AAP विधायक अमनदीप कौर अरोड़ा के घर पर रेड, मोगा में 2 ठिकानों पर तलाशी

केरल, तमिलनाडु सहित देश के कई हिस्सों में ED की कार्रवाई! 11 ठिकाने पर एक्शन में जांच एजेंसी को क्या मिला?

मिग-29, मिराज और जगुआर की विदाई से बढ़ेगी चुनौती, जानिए क्यों भारत को हर साल चाहिए 40 नए लड़ाकू विमान

Indian Railway: 18 ट्रेनों का सुपरफास्ट दर्जा खत्म, यूपी-बिहार के ट्रेनों का किराया होगा सस्ता, देखें लिस्ट

फेक वीडियो शेयर कर फंसे सीनियर वकील प्रशांत भूषण! दिल्ली पुलिस ने भड़काऊ कंटेंट बताकर केस दर्ज किया