हाईकोर्ट ने बीएमसी की अतिरिक्त राहत की मांग खारिज की।
कोर्ट ने आदेश पालन के लिए एक दिन की भी मोहलत देने से इनकार किया।
अदालत ने कहा- पहले आदेश का पालन करें, फिर राहत मांगें।
Bombay High Court BMC Contempt of Court Justice: मुंबई के बोरीवली में बेस्ट बस स्टेशन के लिए तय जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की है और कारण बताओ नोटिस जारी किया है। अदालत ने बीएमसी कमिश्नर और उनके स्टाफ के सैलरी पर रोक लगा दी है।
साथ ही अतिरिक्त समय मांगने की याचिका को खारिज करते हुए 5 लाख का कॉस्ट (जुर्माना) भी लगाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने यह निर्णय लिया है। अदालत ने पूछा है कि कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।
सैलरी पर रोक 1 दिसंबर 2026 तक या कारण बताओ नोटिस का फैसला होने तक जारी रहेगी। पीठ ने बीएमसी अधिकारियों की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए संकेत दिया कि अतिक्रमणकारियों के साथ मिलीभगत हो सकती है।
पीठ ने यह दलील भी खारिज कर दी कि मराठी दस्तावेजों के अंग्रेजी अनुवाद में समय लगा। पीठ ने सवाल उठाया कि हलफनामा दाखिल करने वाले अधिकारी डॉ. तांबे हैं। क्या अदालत यह मान ले कि उन्हें मराठी भाषा नहीं आती? हम उन्हें जेल भेजेंगे, तब उन्हें बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश का महत्व समझ में आ जाएगा।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि बीएमसी कोर्ट के आदेशों का पालन किए बिना अतिरिक्त राहत की मांग नहीं कर सकता। पहले आदेश का पालन किया जाए और उसके बाद उचित राहत के लिए आवेदन दाखिल किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान मुंबई बीएमसी ने अदालत के आदेश का पालन करने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मांगा था। हालांकि, पीठ ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया। न्यायमूर्ति बागची ने स्पष्ट किया कि इस मामले में एक दिन का भी अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।
अदालत ने मामले को न्यायिक आदेशों की अवमानना से जुड़ा बताया। पीठ के रुख से स्पष्ट है कि संबंधित आदेश का पालन किए बिना बीएमसी को राहत नहीं मिलेगी। अदालत ने महानगरपालिका को पहले आदेश का अनुपालन करने और उसके बाद ही उचित राहत के लिए आवेदन करने का निर्देश दिया है।