बॉम्बे हाई कोर्ट अवैध अप्रवासी आधार विवाद  सोर्स- सोशल मीडिया
मुंबई

मुंबई में फर्जी आधार और पैन पर बंबई हाई कोर्ट सख्त, विदेशी घुसपैठियों की पहचान कर निर्वासन का दिया आदेश

Bombay High Court: विदेशी नागरिकों द्वारा फर्जी आधार व पैन कार्ड बनवाने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने एजेंसियों को ऐसे घुसपैठियों को प्राथमिकता से निकालने का निर्देश दिया।

रूपम सिंह

Bombay High Court Illegal Immigrants Aadhaar Row: बंबई हाईकोर्ट ने विदेशी नागरिकों के भारत में घुसपैठ करने और भारतीय नागरिकता का दावा करने के लिए फर्जी तरीके से आधार और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज हासिल करने की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि यह एक 'चिंताजनक पैटर्न' है और इससे विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय तथा दस्तावेजों की जांच व्यवस्था में गंभीर खामियां उजागर होती हैं। न्या. ए.एस. गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ ने कहा कि ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर देश से बाहर भेजना जरूरी है।

अदालत ने केंद्र सरकार के संबंधित विभाग को आधार कानून में संशोधन की संभावनाओं पर विचार करने का निर्देश भी दिया, ताकि जांच एजेंसियां ऐसे लोगों की तुरंत पहचान कर सकें, उन्हें निर्वासित कर सकें और उनके दोबारा भारत आने पर रोक लगाने में मदद मिल सके।

UIDAI को 2 सप्ताह में दस्तावेज देने का निर्देश

पुलिस ने 2019 में माजिद खान शाह और फर्जी दस्तावेज तैयार करने में कथित रूप से उसकी मदद करने वाले कई अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था। हाईकोर्ट ने यूआईडीएआई को निर्देश दिया कि माजिद खान शाह का आधार कार्ड बनाते समय जमा किए गए आवश्यक दस्तावेज दो सप्ताह के भीतर पुलिस को उपलब्ध कराए जाएं। अदालत ने सक्षम आव्रजन अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर उसके खिलाफ निर्वासन की कार्रवाई शुरू करने का

निर्देश दिया है। अदालत की टिप्पणियों से स्पष्ट है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय नागरिकता का दावा करने के मामलों को लेकर सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और दस्तावेज सत्यापन की व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।

अफगान नागरिक से जुड़े मामले में आदेश

हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान ये टिप्पणियां की। याचिका में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को अफगानिस्तान के नागरिक माजिद खान शाह की पहचान और सत्यापन से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

आरोप है कि माजिद खान शाह वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी भारत में रहा। बाद में उसने अपना मूल पासपोर्ट नष्ट कर दिया और मिराज ताहिर खान के नाम से फर्जी पहचान बना ली। आरोप के अनुसार, उसने पैन कार्ड, आधार कार्ड और स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र समेत कई फर्जी दस्तावेज हासिल किए और इनके आधार पर भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिया।

जांच और निर्वासन में देरी नहीं हो बंबई हाईकोर्ट

पीठ ने कहा कि सभी राज्य और केंद्रीय एजेंसियों को ऐसे विदेशी नागरिकों की पहचान और निर्वासन के लिए प्राथमिकता के आधार पर मिलकर काम करना चाहिए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों की जांच निर्धारित समयसीमा में पूरी होनी चाहिए, ताकि आरोपी प्रक्रियागत देरी का लाभउठाकर भारत में बने न रहें।

अदालत ने मानव तस्करी और सीमा पार घुसपैठ जैसी गंभीर समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनसे निपटने के लिए सरकार को प्रभावी और समयबद्ध प्रक्रिया तैयार करने की आवश्यकता है। पीठ ने यह भी कहा कि कई मामलों में ऐसे लोग देश-विरोधी गतिविधियों में शामिल पाए गए है।

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