Bombay High Court Concern Over Water Crisis News: बॉम्बे उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र में पानी की कमी पर चिंता जताते हुए सोमवार को कहा कि स्वच्छ एवं पीने लायक पानी हासिल करना एक बुनियादी अधिकार है। अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि यह समस्या कब तक हल होगी।
न्यायमूर्ति ए एस गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ विदर्भ इलाके के अमरावती जिले के आदिवासी मेलघाट क्षेत्र में कुपोषण के कारण शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं की मौत के मामलों से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे।
बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया गया कि गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने के साथ-साथ, यह इलाका स्वच्छ पानी की कमी से बुरी तरह प्रभावित है। अप्रैल में हुई पिछली सुनवाई में अदालत को बताया गया था कि दूषित पानी पीने से इलाके में 13 लोगों की मौत हो गई थी। सरकार ने सोमवार को पीठ को बताया कि पेयजल के टैंकर समय-समय पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आपूर्ति अनियमित है।
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हाईकोर्ट की टिप्पणी ने एक बार फिर राज्य में जल प्रबंधन और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। अब निगाहें सरकार के अगले कदम और अदालत में पेश किए जाने वाले जवाब पर टिकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जल संकट से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं, जल संरक्षण और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना बेहद आवश्यक है।