बृहन्मुंबई महानगरपालिका (सोर्स: सोशल मीडिया)  
मुंबई

मुंबई में विरोध के बावजूद बिना टेंडर बाहरी एजेंसियों पर 3 करोड़ खर्च करेगी BMC, स्थायी समिति ने दी मंजूरी

Mumbai BMC News: नगरसेवकों के विरोध के बीच बीएमसी की स्थायी समिति ने दहिसर ट्रांजिट हब और 'पार्टिसिपेट मुंबई' पहल के लिए बिना टेंडर ₹3 करोड़ में बाहरी एजेंसियों की नियुक्ति को मंजूरी दी है।

रूपम सिंह

Mumbai BMC Standing Committee: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की स्थायी समिति ने शुक्रवार को दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी देते हुए प्रशासन को बिना निविदा (टेंडर) प्रक्रिया अपनाए लगभग 3 करोड़ रुपये की लागत से बाहरी एजेंसियों की नियुक्ति की अनुमति दे दी। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में विभिन्न राजनीतिक दलों के नगरसेवकों ने बीएमसी द्वारा परियोजनाओं में बाहरी सलाहकारों और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स (पीएमसी) पर भारी खर्च को लेकर सवाल खड़े किए थे।

पीएमसी पर बढ़ते खर्च को लेकर चिंता

नगरसेवकों का आरोप है कि बीएमसी के पास पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता और अनुभवी इंजीनियरिंग तंत्र मौजूद होने के बावजूद परियोजनाओं के लिए बार-बार बाहरी एजेंसियों को नियुक्त किया जा रहा है। इससे सार्वजनिक धन पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। हाल के महीनों में पीएमसी की नियुक्तियों और उन पर होने वाले खर्च को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

ट्रांजिट हब परियोजना के लिए आईआईटी-बॉम्बे की नियुक्ति

स्थायी समिति ने दहिसर में प्रस्तावित ट्रांजिट हब परियोजना के लिए 55 लाख रुपये की लागत से आईआईटी-बॉम्बे को प्रूफ चेकिंग एजेंसी नियुक्त करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। प्रशासन का कहना है कि परियोजना की तकनीकी जटिलताओं को देखते हुए विशेषज्ञ संस्थान की सेवाएं लेना आवश्यक है। इसके लिए नियमित टेंडर प्रक्रिया से छूट मांगी गई थी, जिसे समिति ने स्वीकार कर लिया।

‘पार्टिसिपेट मुंबई’ पहल के लिए ई एंड वाई को जिम्मेदारी

दूसरे प्रस्ताव के तहत बीएमसी की ‘पार्टिसिपेट मुंबई’ पहल के लिए 2.45 करोड़ रुपये की लागत से अर्न्स्ट एंड यंग (ई एंड वाई) को तकनीकी एवं प्रबंधन सलाहकार नियुक्त करने की अनुमति दी गई। यह पहल नागरिक सहभागिता और शहरी विकास योजनाओं में जनभागीदारी बढ़ाने से जुड़ी मानी जा रही है। प्रशासन ने इस नियुक्ति के लिए भी टेंडर प्रक्रिया से छूट का अनुरोध किया था।

डीपीआर तैयार करने में होती है अहम भूमिका

पीएमसी या बाहरी सलाहकार संस्थाएं परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करती हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर परियोजना की रूपरेखा तय की जाती है, लागत का अनुमान लगाया जाता है और बाद में निर्माण कार्य के लिए ठेकेदारों की नियुक्ति की जाती है। इसलिए इन एजेंसियों की भूमिका परियोजना के शुरुआती चरण में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पारदर्शिता पर उठे सवाल

हालांकि प्रशासन का तर्क है कि विशेषज्ञ एजेंसियों की सेवाओं से परियोजनाओं की गुणवत्ता और कार्यक्षमता में सुधार होता है, लेकिन बिना टेंडर सीधे नियुक्ति की मंजूरी को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि ऐसे निर्णयों में प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया अपनाना जरूरी है, ताकि सार्वजनिक धन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।

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