गणेश विसर्जन के दौरान (सोर्स: सोशल मीडिया)
मुंबई

गणपति विसर्जन के लिये BMC ने जारी किया QR Code, एक स्कैन में मिलेगी पास के आर्टिफिशियल पॉन्ड की लोकेशन

गणेशोत्सव में बप्पा के विसर्जन के लिए BMC ने खास QR Code जारी किया है। मोबाइल से स्कैन करके तुरंत पाएं अपने पास के आर्टिफिशियल पॉन्ड की सटीक लोकेशन।

गोरक्ष पोफली

QR Code Artificial Pond Location Mumbai: क्या आप मुंबईवासी हैं? और आप भी अपने बप्पा का विसर्जन BMC द्वारा बनाए गए आर्टिफिशियल पॉन्ड (कृत्रिम तालाब) में करना चाहते हैं? तो अब BMC ने आपके घर के पास के पॉन्ड की लोकेशन पता करने के लिए एक विशेष QR कोड जारी किया है। इसे बस स्कैन करें और तुरंत अपने नजदीकी कृत्रिम तालाब की जानकारी प्राप्त करें।

पर्यावरण-अनुकूल गणेशोत्सव की ओर अहम कदम

गणपति उत्सव के दौरान जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए श्रीगणेश मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में करने का आग्रह किया जा रहा है।

नागरिकों की सुविधा के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है ताकि हर कोई बिना किसी परेशानी के अपने नजदीकी विसर्जन स्थल तक पहुंच सके। अपने मोबाइल से QR कोड स्कैन करते ही आपको पास के कृत्रिम तालाब की सटीक लोकेशन मिल जाएगी।

BMC द्वारा जारी किया गया QR कोड

निर्माल्या से बनेगी खाद

विसर्जन के साथ-साथ भगवान गणेश को अर्पित किए जाने वाले निर्माल्या (पूजा के फूल-पत्तियां) के प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एकत्र किए गए निर्माल्या काे प्रोसेस करके उससे उत्तम खाद तैयार की जाएगी। इस पहल से एक तरफ जहां प्राकृतिक जलस्रोत स्वच्छ रहेंगे, वहीं दूसरी ओर वेस्ट मैनेजमेंट के जरिए पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

अगर आप भी इस गणेशोत्सव में पर्यावरण को सुरक्षित रखने में अपना योगदान देना चाहते हैं, तो दिए गए QR कोड को स्कैन करें और बप्पा का विसर्जन अपने पास के ही कृत्रिम तालाब में करें।

BMC की पहल सांकेतिक फोटो

पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन पहल की मुख्य बातें

बृहन्मुंबई महानगरपालिका की यह पर्यावरण-अनुकूल पहल गणेशोत्सव के दौरान स्वच्छता और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस डिजिटल सुविधा के माध्यम से मुंबईवासी अपने पास के कृत्रिम तालाब की सटीक जानकारी और लोकेशन केवल एक QR कोड स्कैन करके आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

इससे न केवल विसर्जन स्थलों पर होने वाली असुविधा और भीड़भाड़ से बचा जा सकेगा, बल्कि प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए श्रीगणेश मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में ही करने का संदेश भी प्रभावी रूप से पहुंचेगा।

इसके अलावा, पूजा में अर्पित किए जाने वाले निर्माल्या से खाद तैयार करने का निर्णय पर्यावरण संतुलन की दिशा में एक बेहतरीन पहल है। इस प्रकार, नागरिक अपनी आस्था और परंपरा का पालन करते हुए पर्यावरण संरक्षण में भी सक्रिय भागीदारी निभा सकते हैं।

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