Arvind Sawant On TVK Party Majority: तमिलनाडु में सत्ता की चाबी फिलहाल राजभवन के पास फंसी हुई नजर आ रही है। सुपरस्टार विजय की पार्टी सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बावजूद बहुमत के जादूई आंकड़े 118 से महज 6 कदम दूर है। विजय ने अन्य दलों के सहयोग से 112 विधायकों का समर्थन जुटा लिया है, लेकिन राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक 118 विधायकों के भौतिक हस्ताक्षर वाला पत्र पेश नहीं किया जाता, तब तक सरकार बनाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी। राज्यपाल के इस कड़े रुख ने विपक्षी खेमे को नाराज कर दिया है।
शिवसेना (UBT) के सांसद अरविंद सावंत ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और राज्यपाल की दोहरी राजनीति पर हमला बोला है। उन्होंने महाराष्ट्र के 2019 के घटनाक्रम की याद दिलाते हुए पूछा कि क्या उस समय के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने देवेंद्र फडणवीस को शपथ दिलाने से पहले आंकड़े गिने थे। सावंत ने कहा कि एक ही देश में अलग-अलग राज्यों के लिए अलग-अलग संवैधानिक कानून नहीं हो सकते।
अरविंद सावंत ने 2019 के उस चर्चित घटनाक्रम का हवाला दिया जब सुबह-सुबह राजभवन में देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री और अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उन्होंने कहा, "उस वक्त राज्यपाल ने आंकड़े गिने थे क्या? किसी को याद है? वहां बिना आंकड़े देखे शपथ दिला दी गई और यहां विजय से हस्ताक्षर मांगे जा रहे हैं। यही भाजपा की दोहरी राजनीति है।" गौरतलब है कि वह सरकार बहुमत न होने के कारण महज तीन दिनों में गिर गई थी।
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पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या पर दुख जताते हुए अरविंद सावंत ने इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि राजनीति में चुनावी प्रतिस्पर्धा होनी चाहिए, व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं। सावंत के अनुसार, वर्तमान में जिस तरह की भाषा और बर्ताव राजनीतिक दलों के प्रमुख कर रहे हैं, उसी का परिणाम ऐसी हिंसक घटनाएं हैं। उन्होंने नेताओं को आत्मचिंतन करने की नसीहत दी ताकि समाज में नफरत के बीज न बोए जाएं।
इसी बीच, संजय राउत ने भी बंगाल के नतीजों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन की बात न मानकर बड़ी गलती की। उनके अनुसार, यदि विपक्षी एकता और मजबूत होती, तो परिणाम कुछ और हो सकते थे। तमिलनाडु और बंगाल के इन घटनाक्रमों ने देशभर में राज्यपाल की शक्तियों और निष्पक्षता को लेकर एक नई संवैधानिक बहस छेड़ दी है, जिसका असर आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजनीति पर दिखना तय है।